Hindi Love Story: – बचपन में बिताए गए पल, मनुष्य के जीवन को प्रभावित करते हैं मतलब एक बच्चे के बचपन में घटित होने वाली घटना उसके जीवन पर बुरा असर डाल सकती हैं ज़िंदिगी में हर माता-पिता अपने बच्चे के विकास एंव सुरक्षा हेतु चिंतित रहते हैं
एक बच्चा अपनी शिक्षा हेतु घर से बाहर निकलता हैं जिसके बाद वह समाज में घुल-मिलकर सामाजिक वातावरण को सीखता हैं उस दौरान उसके माता-पिता एक ढाल बनकर हमेशा उसके साथ खड़े रहते हैं जहाँ एक माँ उसके पारिवारिक वातावरण का अधिक दायित्व उठाती हैं
तथा एक पिता उसके सामाजिक वातावरण का अधिक दायित्व उठाता हैं लेकिन कुछ बच्चों के जीवन में माता-पिता का यह सुख नहीं होता हैं लेकिन कहा जाता है कि भगवान हर व्यक्ति के साथ निसाफ़ करता हैं यह बचपन के प्यार वाली एक ऐसी कहानी हैं जहाँ रुही के जीवन में प्यार का मतलब जयंत बनता हैं
कहानी किरदार सूची
| लड़की का नाम – | रुही सैनी (जन्मतिथि 8 मार्च) |
| पिता – | अरवीन्द्र सैनी |
| माता – | मीरा सैनी |
| दादा का नाम – | रामपाल सैनी |
| दादी का नाम – | मनीषा सैनी |
| लड़के का नाम – | जयंत कश्यप |
| पिता – | अर्जुन कश्यप |
| माता – | जीया कश्यप |
| दादा – | राजेन्द्र कश्यप |
| दादी – | माया कश्यप |
जयंत बना रुही का प्यार (Love Story in Hindi) – मजेदार कहानियाँ (Hindi Love Story) – Romantic Stories in Hindi
यह दिल को छू जाने वाली प्रेम कहानी उत्तर-प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमबाग से हैं जहाँ निवास करने वाले सैनी परिवार में 8 मार्च 2016 को एक सुन्दर बालिका (रुही सैनी) का जन्म होता है, रुही के पिता (अरवीन्द्र सैनी) लखनऊ में एक वित्तीय कंपनी के स्वामी हैं,
अपने उचित फैसलों के कारण यह एक सफल बिजनसमैंन हैं रुही का जीवन सामान्य बच्चों की तरह नहीं हैं क्योंकि उसके जन्म के दौरान, उसकी माता मीरा का देहांत हो गया था, उसके माता-पिता ने प्रेम विवाह किया था
परिणामस्वरूप वैवाहिक जीवन में मीरा-अरवीन्द्र के बीच बहुत प्रेम था लेकिन रुही के जन्म के बाद मीरा के देहांत से वह बिल्कुल टूट सा गया था जिसके बाद वह चुप-चाप सा रहता था अपनी बच्ची रुही के लिए उसके दिल में प्रेम था लेकिन वह उसको बया नहीं कर पाता था
रुही का पालन-पोषण उसकी दादी मनीषा सैनी तथा दादा रामपाल सैनी के द्वारा किया जाता था इसीलिए रामपाल और मनीषा के दिल में अपनी पोती रुही के लिए अत्यंत प्रेम था लेकिन एक बच्चे के जीवन में उसके माता-पिता की कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता हैं
इस तरह के महोल में पलने वाली रुही भी अपने पिता की तरह चुप-चाप रहने लग गई थी परिणामस्वरूप वह खुद को जीवन में अकेला महसूस करने लगी, उसको यह लगता था कि उसके पापा उसको प्यार नहीं करते हैं जिसके कारण पिता के साथ रुही की नहीं बनती थी
रुही वाली कॉलोनी का निवासी जयंत
जयंत कश्यप, अपने सम्पूर्ण परिवार का लाड़ला लड़का हैं उसके पिता अर्जुन कश्यप लखनऊ में एक बहुत पुराने सुनार हैं जिनका आर्थिक बैकग्राउंड काफी अच्छा हैं, माँ जीया कश्यप भी एक बिजनस वुमन हैं जोकि लखनऊ में एक कपड़ा व्यापारी हैं
जयंत अपने माता-पिता के साथ साथ अपने दादा (राजेन्द्र कश्यप) और दादी (माया कश्यप) का भी अत्यंत लाड़ला हैं माता-पिता के कामकाज में अधिक व्यस्त रहने के कारण जयंत अपने दादी-दादी के साथ अधिक समय बीतता है जयंत और उसका पूरा परिवार रुही वाली कॉलोनी के निवासी हैं,

जयंत के दादा जी के साथ रुही के दादा रामपाल के साथ अधिक गहरी दोस्ती है जयंत एक शरारती लड़का होने के साथ-साथ अत्यंत समझदार भी हैं वह रुही को बहुत लंबे समय से शांत चुप-चाप रहने वाली स्थिति में देख रहा हैं रुही की तुलना में जयंत का स्वभाव बिल्कुल उल्टा हैं
वह महोल को शरारत से भरने वाला लड़का हैं, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि लड़कियों के मामले में भी वह एक शरारती लड़का है
स्कूल में रुही का स्वभाव और व्यवहार
माता-पिता के प्यार के बिना बच्चा, बहुत कम उम्र से उदासी का जीवन जीने के पथ पर अग्रसर हो पड़ता हैं यह उदासी रुही के स्कूल में उसके व्यवहार को चिंता का विषय बना रही थी अरवीन्द्र द्वारा रुही को सेंट एंथनी पब्लिक स्कूल मे पढ़ाया जा रहा था
एक चुप-चाप उदास अवस्था में रहने वाली लड़की स्कूल में किसी भी बच्चे के साथ अधिक बोलना पसंद नहीं करती थी शिक्षकों को रुही की यह अवस्था एक चिंता का विषय दिखाई दी परिणामस्वरूप स्कूल द्वारा रुही के दादा जी को स्कूल में बुलाया जाता हैं,
तब उसके दादा रामपाल, अपने मित्र राजेन्द्र के साथ, रुही के शिक्षक से मिलने हेतु उसके स्कूल जाते हैं जहाँ उनको स्कूल मे रुही के व्यवहार को लेकर सूचना दी जाती हैं रुही के विषय पर यह चिंताजनक बाते सुनकर उसके दादा चिंतित हो जाते हैं अपने मित्र को चिंता मे देखकर,
उसके दादा राजेन्द्र, रामपाल के सामने रुही और जयंत की दोस्ती कराने का विचार रखते हुए कहते हैं कि देखो मित्र रामपाल! मेरा पोता बहुत ज्यादा शरारती लड़का हैं लेकिन बहुत समझदार हैं, तुम्हारी पोती रुही को ऐसे मित्र की जरूरत हैं जो उसे प्यार का मतलब समझा सकें
रुही के दादा, राजेन्द्र की बातों पर विचार करते हुए कहते हैं कि हाँ! भाई मैंने तेरे पोते जयंत को देखा हैं वह हर समय खुश रहने वाला लड़का हैं और मेरी पोती के जीवन में खुशियों की कमी हैं जिसके कारण वह चुप-चाप रहने लगी हैं, शायद! तेरा पोता, मेरे पोती के जीवन में खुशियाँ ला सकें
राजेन्द्र हँसते हुए कहता हैं कि हाँ भाई! जयंत शरारती तो बहुत हैं लेकिन उसका पालन-पोषण मैंने और माया ने साथ मिलकर किया हैं इसीलिए मैं यह कह सकता हूँ कि तेरी पोती मेरे जयंत के साथ सुरक्षित और खुशी के साथ दोस्ती कर सकती हैं शरारती होने के कारण उसकी बहुत सारी लड़कियाँ दोस्त हैं
लेकिन वह लड़कियों का सम्मान करना अच्छे से जानता हैं लेकिन हमे कुछ ऐसा करना होगा जिससे रुही-जयंत खुद एक दूसरे के साथ दोस्ती करे, क्योंकि अगर जयंत को पता चला कि यह सब मेरा प्लान हैं तो कही उसकी मेरे दोस्ती ना खराब हो जाए
रामपाल ने उससे कहा कि हाँ भाई! तुम दोनों दादा पोते की दोस्ती खराब नहीं होनी चाहिए लेकिन अब विचार दिया है तो यह भी बता मुझे कि उन दोनों को मिलवाना कैसे हैं?
राजेन्द्र थोड़ा समय सोचने के बाद कहता है कि जयंत को फोटो खीचने का बहुत शौक हैं मैं कल उसको पास वाले पार्क में फोटो खीचने के लिए लेकर जाऊंगा, वहाँ तू रुही बिटिया को घुमाने के लिए लेकर आना और कुछ समय के लिए अकेला छोड़ देना
रामपाल अपने मित्र राजेन्द्र की बातों को अच्छे से समझ गया था जिसके बाद उसने अपने घर जाकर रुही को घुमाने लेकर जाने वाली बात स्कूल से घर आने के बाद रुही को बताई जिसको सुनकर रुही के मुँह पर कोई खुशी नहीं थी लेकिन वह अपने दादा जी की बातों का सम्मान रखते हुए,
उनके साथ जाने के लिए तैयार थी उधर राजेन्द्र अपने पोते को फोटो खीचने के लिए एक पार्क दिखाता हैं, फोटो खीचने का शौक जयंत को अधिक होने के कारण पार्क की खूबसूरती उसको आकर्षित कर लेती हैं जिसके बाद वह खुशी-खुशी पार्क जाने के लिए तैयार हो जाता हैं
रुही संग जयंत की प्रथम मुलाकात
सुबह-सुबह के समय रुही के दादा रामपाल, रुही के साथ पार्क पहुँच जाने के बाद एक शांत बगीचे में रुही को खड़ा करके बोलने लगते हैं कि रुही बेटा यहाँ तुम्हारे जैसे अनेक बच्चे हैं और वातावरण इतना सुखद हैं मुझे लगता है कि तुम्हें यह महसूस करना चाहिए?
मैं वहाँ सामने वाले पार्क में अपने कुछ दोस्तों के साथ योगा कर रहा हूँ वहाँ तुम बोर हो जाओगी इसीलिए तुम यहाँ पर सुन्दर वातावरण का आनंद लो
उधर जयंत के साथ उसके दादा राजेन्द्र वहाँ पहुँच जाते हैं जयंत के हाथों में कमेरा हैं और वह फोटो वाली लोकैशन को ध्यान से देख रहा हैं तभी राजेन्द्र, रामपाल को देखते हुए कहता है कि अरे रामपाल! तुम अभी तक यहाँ हो चलो भाई! सब लोग इंतेजार कर रहे होंगे हमारा..
रामपाल कहता है कि हाँ यार चल रहा हूँ वो मेरे पोती यहाँ अकेली हैं ना, बस इसीलिए थोड़ा उससे बातचीत कर रहा था..
यह सुनकर राजेन्द्र बोलता है कि नहीं-नहीं! रुही अकेली कहाँ हैं मेरा पोता जयंत है ना, वो उसका ध्यान रख लेगा तू परेशान ना हो, और हम भी पास मे ही योगा कर रहे हैं
जिसके बाद राजेन्द्र अपने पोते जयंत से कहता है कि देखो बेटा जयंत! तुम्हें फोटो खीचने के साथ-साथ रुही बेटी का ध्यान रखना होगा ठीक है ना..
यह कहकर राजेन्द्र और रामपाल वहाँ से चले जाते है जिसके बाद जयंत रुही को देखता हैं लेकिन रुही बिल्कुल चुप-चाप हैं, जयंत उसे इस आवस्था मे देखकर खुद परेशान सा महसूस होने लगा था उस समय जयंत के लिए यह एकदम नया एहसास था

जो उसे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था अपने दादा राजपाल को जाते हुए देखकर रुही अधिक निराश होने लगती हैं जिसके बाद जयंत उसकी फोटो खीचने लगता हैं ऐसा करके वह उसका ध्यान, उसके दादा के ना होने से हटा रहा था
जयंत एक शरारती लड़का हैं और कई लड़कियों को अपना दोस्त बना चुका हैं लेकिन उसके लिए रुही से दोस्ती करना एक खास बात थी रुही की फोटो खीचने से शुरू हुआ यह किस्सा बातचीत में बदल गया था वैसे रुही चुप रही थी लेकिन जयंत की शरारती बाते उसको खुशी का एहसास दिलाने लगी थी

कुछ समय बाद रुही जयंत के साथ फोटो खीचने में छुपे आनंद को महसूस करने लगी थी जिसके बाद, रुही और जयंत दोनों उस पार्क में एक दूसरे के फोटो को पूरी मस्ती और हँसी मजाक वाले महोल का आनंद लेते हुए खीच रहे थे
उस दौरान जयंत द्वारा रुही को जीवन में एक अच्छे दोस्त के महत्व का एहसास करवाया जाता है उसके दादा छुपकर उसको देखते हुए मित्र राजेन्द्र से कह रहे थे कि राजेन्द्र! मैंने बहुत समय बाद रुही को इतना खुश रहते हुए देखा हैं
इतना कहकर वह भावुक होने लग जाता हैं जिसके बाद राजेन्द्र उससे कहता है कि अरे! अभी तो यह पहली मुलाकात हैं मुझे पूरा यकिन हैं कि रुही बेटी के जीवन में, जयंत खुशी लेकर आएगा लेकिन हमे यहाँ रिस्क को भी समझना होगा रामपाल! यह मेरे लड़के पोते का सवाल हैं और मैं उसको जीवन में कभी दुख मे नहीं देखना चाहता हूँ
रामपाल कुछ समझ नहीं पाता है और कहता है कि यार! तू यह क्या बात कर रहा है मेरे कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा हैं
राजेन्द्र, रामपाल को समझाते हुए कहता है कि देख रामपाल यह हँसी मजाक ठीक हैं लेकिन प्यार पर किसी का जोर नहीं चलता हैं ऐसी अवस्था में अगर जयंत और रुही एक दूसरे को प्रेम करने लगते है तो भविष्य में हमें इनका विवाह करवाना होगा
रामपाल उसकी बातों को समझने का प्रयास करता है और कहता है कि हाँ, भाई यह दोनों हमारी वजह से मिल रहे हैं और भविष्य में अगर इन दोनों के बीच प्यार होता है तो हमे इनको एक करना होगा क्योंकि यह सब हमारे द्वारा शुरू हो रहा हैं और मैं तुझे और तेरे पोते जयंत दोनों को अच्छे से जानता हूँ भाई, तू चिंता ना कर भविष्य में हम सब संभाल लेंगे
जयंत के दादा राजेन्द्र उनका प्लान काम कर रहा था क्योंकि जयंत से मिलने के बाद रुही का स्वभाव बदलने लगा था वह खुलकर खुशी के साथ जीना सीख रही थी उसकी ज़िंदिगी में इतने बदलाव का कारण वह लड़का जयंत था
पार्क में घूमने के कुछ समय बाद, रुही ने पंखुड़ी पर फूक मरते हुए एक क्यूट-सा फोटो जयंत के द्वारा खीचवाया

गहरी दोस्ती वाली दूसरी मुलाकात
कुछ महीनों तक जयंत और रुही का मिलना, खेलना-कूदना, एक दूसरे के साथ हँसी मजाक वाले पल बिताना चल रहा था उसके बाद वह दोनों अपनी बचपन वाली मासूमियत के कारण गहरी दोस्ती कर चुके थे जयंत एक समझदार लड़का था वह यह जानता था कि दोस्ती जैसा पवित्र रिश्ता हम खुद चुनते हैं

इसीलिए वह रुही संग अपनी पक्की दोस्ती को अधिक खास मानता था एक दिन वह घूमने के उद्देश्य से किसी चिल्ड्रन पॉइंट पर मिले जहाँ उन्होंने एक दूसरे के साथ बहुत मस्ती किया रामपाल अपनी पोती रुही को लाइफ में खुश देखकर खुश था समय के साथ-साथ उनकी यह दोस्ती अत्यंत गहरी होती जा रही थी
जयंत-रुही में बढ़ा प्यार का एहसास
जयंत और रुही के बचपन से चली आ रही दोस्ती, युवा अवस्था के दौरान उनके प्यार मे बदलने लगी उन दोनों के दिलों में एक दूसरे के लिए प्यार का एहसास जन्म लेने लगा था बचपन वाले दोस्त होने के कारण उनके सम्पूर्ण परिवार वाले एक दूसरे को अच्छे से जानते थे
कही ना कही रुही के पिता अरवीन्द्र को भी यह बात पता था कि उसकी बेटी रुही और जयंत अच्छे मित्र हैं, इन दिनों जयंत के कारण रुही अपने पिता को समझने लगी थी और उनके चुप-चाप महसूस किये जाने प्रेम को पहचान ने लगी थी
वह दोनों अक्सर एक दूसरे के साथ पार्क में ठंडी हवा और स्वच्छ वातावरण का आनंद लेते हुए समय बिताना पसंद करते थे एक दिन जयंत ने रुही के समक्ष अपने प्यार का इजहार करते हुए कहा कि
रुही! हमारी मित्रता को कई वर्ष बीत चुके हैं शायद! तुम जानती नहीं हो कि तुम मेरी ज़िंदिगी में कितनी खास हो, तुम्हारे साथ मेरा ऐसा लगाव हो गया है कि मन करता है कि पूरा समय तुम्हारे साथ गुजर जाए, मेरी ज़िंदिगी में तुम्हारा होना मुझे सुकून देता हैं,
कोई और लड़की होती तो झूठ बोल लेता लेकिन तुमसे यह छुपाने का मन नहीं करता है कि मेरे दिल मे तुम्हारे लिए बहुत सारा प्यार हैं मैं भविष्य और वर्तमान दोनों तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ हम अच्छे दोस्त है और ऐडल्ट भी, हम इस विषय पर एक दूसरे के साथ खुलकर बात कर सकते हैं
यहाँ जयंत साधारण शब्दों मे रुही के सामने अपना साफ दिल खोलकर रख देता है जयंत की भावनाओ को देखकर रुही भावुक होते हुए कहती है कि
जयंत! मैं तो बचपन मे ही कही खो चुकी थी तुमने मुझे बचाया है, तुम मेरे साथ रहते हो तो मुझे कोई चिंता नहीं होती हैं, माँ नहीं हैं मेरे पास, लेकिन तुम हो जिसके साथ मैं अपने जीवन से जुड़ी हर बात शेयर कर सकती हूँ, तुम्हारे साथ होने पर मै खुश रहती हूँ,
तुम्हारे साथ ना होने पर, तुम्हारे साथ जिए पालो को याद करती रहती हूँ, हाँ! यह सब प्यार हैं, मेरे दिल में तुम्हारे लिए प्यार हैं

जयंत और रुही दोनों एक दूसरे के साथ अपनी दिल वाली बाते शेयर करके अच्छा महसूस कर रहे थे एक दूसरे के प्रेम को स्वीकार करने के बाद वह पार्क में एक बेच पर कुछ समय अकेले बैठ जाते हैं जहाँ वह अपने-अपने जीवन में एक दूसरे के होने को महसूस करके सुकून का अनुभव करते हैं
पढ़ाई पूर्ण होने के बाद हो गया विवाह
अपने सच्चे इश्क का इजहार करने के दौरान रुही और जयंत कक्षा 12 के छात्र थे लेकिन उसके बाद उन दोनों के द्वारा अपनी ग्रेजुएशन पूर्ण होने के बाद परिवार की सहमति के साथ उनका विवाह सम्पूर्ण रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ,
उनके विवाह में परिवार को मनाने मे जयंत और रुही के दादा क्रमश: राजेन्द्र और रामपाल का अधिक योगदान रहा है जिन्होंने सबसे पहले अपने-अपने घरों मे विवाह के फैसले को लेकर बातचीत शुरू की जिसके बाद एक दूसरे के परिवार वालों को मनाया
परिणाम स्वरूप लखनऊ में दो प्रेमियों का मिलन सुख-शांति के साथ हो गया रुही अपने वैवाहिक जीवन में जयंत के साथ अत्यंत खुशहाल जीवन व्यक्त कर रही थी दोनों बचपन के पालो को याद करना चाहते थे जिसके लिए वह घूमने के उद्देश्य से रानीखेत गए

जहाँ उन्होंने बचपन की तरह एक दूसरे की सुन्दर-सुन्दर तस्वीरे क्लिक किया लेकिन आज उन दोनों के बीच प्यार साफ-साफ दिखाई दे रहा था वह दोनों एक दूसरे की पूरी दुनिया थे लाइफ में खुश रहने की आदत जयंत के अंदर आज भी थी

नमस्ते! मैं नितिन सोनी कई वर्षों से इंटरनेट पर एक लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूँ मुझे मजेदार कहानियाँ, शायरियाँ और रिश्तों संबंधित अन्य लेखों को शेयर करना अच्छा लगता हैं मेरे द्वारा एनएस Quotes मंच पर अनेक उपयोगी आर्टिकल को शेयर किया जाता हैं लेखक के साथ-साथ मैं इस ब्लॉग का फाउन्डर भी हूँ मेरा यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! दुबारा भी आए
