जानवी हैं आरव के बचपन का प्यार (Bachpan Ka Pyar) एक सच्ची प्रेम कहानी

Bachpan Ka Pyar: – युवा अवस्था मे पहुँचने के बाद हर मनुष्य अपने बचपन को बहुत अच्छा मानता हैं क्योंकि मनुष्य का बचपन मासूमियत, शरारत, गलतियाँ, प्यार, भोलेपन इत्यादि से भरा होता है व्यक्ति के जीवन में उसका बचपन उसका वो वक्त होता हैं

जिसमे उसको संसार या जीवन की कोई चिंता नहीं होती हैं परिवार एंव पिता का साथ हर समय उसको मिलता हैं

मुख्यत: बच्चे द्वारा लगभग 3 वर्ष आयु प्राप्त करने के दौरान माता-पिता द्वारा उसको स्कूल में पढ़ाई हेतु बिठाने का निर्णय लिया जाना शुरू हो जाता हैं जिसके बाद शुरुआती कुछ वर्षों में धीरे-धीरे बच्चा स्कूल एंव घर से बाहर के वातावरण को समझना शुरू करता हैं

मनुष्य जब बाल अवस्था से युवा अवस्था की तरफ बढ़ता हैं तब वह प्यार से जुड़े भाव को समझना शुरू करने लगता हैं इस स्थिति में बचपन का प्यार होना एक स्वभाविक बात हैं लेकिन बचपन का प्यार अत्यंत शुद्ध और मासूमियत भरा हो सकता हैं

कुछ समय पहले म्यूजिक इंडस्ट्री में बादशाह(सिंगर) द्वारा जान मेरी जानेमन बचपन का प्यार मेरा भूल नहीं जाना हिट हुआ था जिसमें एक बच्चे की आवाज को लिया गया था म्यूजिक इंडस्ट्री में यह गाने काफी प्रचलित रहा हैं

लेकिन आज हम उस बचपन वाली प्रेम कहानी के विषय पर आपको बताने वाले हैं जिसमें आरव के बचपन की दोस्त उसकी जीवनसाथी बन जाती हैं जाह्नवी संग आरव की प्रेम कहानी मासूमियत वाले प्रेम पर आधारित हैं

कहानी में किरदारों के बारे मे जानकारी सूची

लड़के का नाम –आरव वर्मा
पिता का नाम –वरुण वर्मा
माता का नाम – शिवानी वर्मा
लड़की का नाम – जाह्नवी वर्मा
पिता का नाम – राजीव वर्मा
माता का नाम – पूजा वर्मा
दादा का नाम – मुकेश वर्मा

 

आरव के बचपन वाली प्रेम कहानी (Bachpan Ka Pyar) – Love Story in Hindi (प्रेम कहानियां) – Romantic Story in Hindi..

दिल को छू लेने वाली यह बचपन की प्रेम भरी कहानी उत्तर-प्रदेश के मेरठ शहर से हैं जहाँ आरव वर्मा नामक एक मासूम-सा सुन्दर लड़का शिवानी एंव वरुण वर्मा के घर जन्म लेता हैं कुछ लोगों द्वारा लाइफपार्टनर के विषय पर यह कहा जाता हैं कि जोड़ीयाँ तो ऊपर वाला बनाता हैं

शायद! यह बात बालक आरव पर लागू होती थी क्योंकि उधर मेरठ जिले के माधवपुरम निवासी राजीव के घर जाह्नवी नामक लक्ष्मी का जन्म होता हैं जाह्नवी के जन्म से पूजा-राजीव एंव उनका अन्य समस्त परिवार बहुत खुश होते हैं जाह्नवी के पिता राजीव वर्मा एक खानदानी सुनार है

परिणामस्वरूप सुनारों में उनकी अच्छी जान पहचान हैं मेरठ के सराफा बाजार में उनकी दुकान हैं दूसरी तरफ वरुण वर्मा इंद्रानगर (मेरठ) के निवासी हैं जोकि एक व्यापारी होने के साथ-साथ एक बड़े निवेशक भी हैं दोनों परिवारों में बच्चों की आयु 3 वर्ष होने पर उनका एडमिशन स्कूल में करवाया जाता हैं

आरव-जानवी मे हुई पहली मुलाकात

मेरठ जिले के ब्रह्मपुरी मे स्थित किड होम पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले दो छात्रों की पहली मुलाकात पार्क मे होती हैं यह शाम का व्यक्त था जब आरव के मम्मी-पापा उसको गांधी रोड पर स्थित गांधी पार्क में घुमाने के लिए लेकर जातें हैं

आश्चर्य वाली बात यह थी कि जाह्नवी अपने दादा मुकेश वर्मा के साथ घूमने हेतु उसी पार्क में आई थी उस दौरान दोनों की मासूम भरी मुलाकात एक फूल के कारण होती हैं आरव के हाथों में खेलने के उद्देश्य से एक फूल होता हैं

आरव-जानवी मे हुई पहली मुलाकात

जाह्नवी अपने दादाजी के साथ दादाजी का बेग अपने हाथों में रखते हुए सामने से आ रही होती हैं मासूम लड़के आरव का ध्यान उसके हाथ पर रखे फूल पर होता हैं परंतु जाह्नवी से टकराने के कारण उसका वह फूल हाथों से गिर जाता हैं जिसके बाद जाह्नवी फूल उठाकर वापस उसको आरव के हाथों पर रखते हुए सॉरी बोलती हैं

किड होम पब्लिक स्कूल मे हुई दूसरी मुलाकात

आरव को उसके माता-पिता द्वारा शुरू से किड होम पब्लिक स्कूल में पढ़ाया जा रहा हैं लेकिन जाह्नवी क्लास LKG से किड होम पब्लिक स्कूल को जॉइन करती हैं जहाँ आरव और जाह्नवी की दूसरी मुलाकात होती हैं जाह्नवी कक्षा में नई होने के कारण जल्दी किसी भी बच्चे से घुलती-मिलती नहीं हैं

लेकिन आरव को देखकर उसको यह याद आ जाता हैं कि वह पहले उससे पार्क में मिल चुकी हैं आरव एक शांत स्वभाव व्यक्तित्व वाला लड़का हैं जोकि कम बोलना पसंद करता हैं कुछ दिनों में जाह्नवी अन्य लड़कियों के साथ अपनी दोस्ती कर लेती हैं

जाह्नवी संग आरव हुई दोस्ती शुरू

बाल अवस्था में दोस्ती और इश्क दोनों मासूमियत से भरे होते हैं जाह्नवी को पढ़ने के साथ-साथ चित्र बनाने का बहुत शौक हैं उधर लड़का आरव पढ़ाई मे अधिक रुचि रखता हैं उस स्थिति मे एक स्कूल में पढ़ने वाले दोनों बच्चों में दोस्ती की शुरुआत पेंसिल लेने से होती हैं

जानवी संग आरव हुई दोस्ती शुरू

यह वो दिन था जब किड होम पब्लिक स्कूल द्वारा कक्षा LKG के सभी छात्रों को घर वाली ड्रेस में घुमाने के लिए पार्क ले जाया गया था वहाँ जाह्नवी द्वारा आरव से चित्र बनाने हेतु पेंसिल ली गई आरव-जाह्नवी में हुई यह मुलाकात उनकी गहरी दोस्ती का कारण बनी थी

आरव तथा जाह्नवी दोनों अपनी बच्चों वाली मासूमियत लेकर एक दूसरे के साथ खुशी वाले पल बीता रहे थे किड होम पब्लिक स्कूल द्वारा यह दो दिन का कैम्प था जिसमें शाम के समय पार्क में पिगनिक का आनंद लिया गया उस दौरान जाह्नवी -आरव में दोस्ती शुरू हो चुकी थी

परिणाम स्वरूप वह दोनों अगले दिन एक साथ घूम रहे थे स्कूल द्वारा दूसरे दिन बच्चों को चिल्ड्रन सपोर्ट पर लेकर जाया गया था जहाँ जाह्नवी और आरव दोनों ने एक साथ समय बिताया उस दौरान दोनों बच्चों वाली दोस्ती मे मस्त रहे

उनके बीच यह दोस्ती मानो पहले से भगवान द्वारा लिखी गई थी चिल्ड्रन सपोर्ट पर जाह्नवी और आरव दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर घूम रहे थे टीचर द्वारा यह देखकर, इस पल का फोटो अपने कैम्प की यादों के रूप में लिया गया

जानवी संग आरव हुई दोस्ती शुरू

जानवी संग आरव हुई दोस्ती शुरू

कक्षा 5th में आए जाह्नवी आरव के किस्से

छोटी कक्षा से चली यह दोस्ती जाह्नवी और आरव के कक्षा 5th में आने तक थोड़ी बढ़-सी गई थी यह वो समय था जब बच्चों की अच्छी दोस्ती को लेकर उनके परिवार वालों को सब पता था सरल शब्दों में कहा जाए तो जाह्नवी और आरव दोनों अच्छी चाइल्डहुड फ्रेंड बन चुके थे

एक दूसरे के साथ खेलना-कूदना, समय बिताना, मिलकर पढ़ाई करना, थोड़ा बहुत लड़ाई झगड़े करना तथा लड़ाई के बाद एक-दूसरे को मनाना यह सब उनकी दोस्ती मे होना शुरू हो गया था उस दौरान दोनों की उम्र लगभग 10 वर्ष थी परिणामस्वरूप जाह्नवी और आरव दोनों थोड़े बहुत समझदार होने लगे थे

यह कहा जा सकता है कि आरव और जाह्नवी को एक-दूसरे के साथ रहना और समय बिताना अब अच्छा लगने लगा था

जाह्नवी -आरव के शहरती किस्से

कक्षा 5th से 12th तक दोनों बच्चे (आरव-जाह्नवी) एक साथ किड होम पब्लिक स्कूल में पढे हैं उस दौरान समय के साथ-साथ उनकी शरारत के किस्से अनेक हैं एक दूसरे का टिफिन खाना, क्लास में साथ रहना, एक दूसरे के साथ हँसी मजाक करना इत्यादि किस्से क्लास वाले बहुत हैं

पढ़ाई में अच्छे होने के साथ साथ वह खेलने-कूदने में भी अच्छे थे स्कूल द्वारा कही घूमने जाने वाली बात सुनकर, वह अत्यंत खुश हो जाया करते थे एक दिन स्कूल द्वारा जाह्नवी और आरव को एक टूर पर लेकर जाया गया जहाँ उन्होंने एक साथ मिलकर बहुत मस्ती किया

उसके साथ-साथ जाह्नवी संग आरव ने दोस्ती की यादों को दिखाते हुए कुछ खूबसूरत फोटोज खिचवाये

जानवी-आरव के शहरती किस्से

जानवी-आरव के शहरती किस्से

यहाँ यह कहा जा सकता हैं कि उन दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ने लगी थी कक्षा 10 तक उन दोनों के द्वारा छुपके-छुपके एक दूसरे को देखना शुरू हो चुका था यह एक ऐसा समय था जब उनकी आयु लगभग 16 वर्ष थी इसीलिए युवाअवस्था में पुरुष और स्त्री दोनों के अंदर अनेक बदलाव होना शुरू हो जातें हैं

हाँ प्यार वाली फीलिंगस तक दोनों के दिलों में नहीं आई थी परंतु वह दोनों एक-दूसरे के बिना अधिक समय तक नहीं रह पाते थे बचपन में इस स्थिति को प्रेम का नाम देना उन मासूम बच्चों के लिए उचित नहीं था इसीलिए वह इसे अपनी अच्छी दोस्ती का असर मानते थे कक्षा 12 तक पहुँचने पर उन्हे धीरे-धीरे एक दूसरे की परवाह होने लगी थी

12 कक्षा के बाद जाह्नवी और आरव का अलग होना

ग्रेजुएट वाली पढ़ाई को पूर्ण करने के लिए कक्षा 12 पास करने के बाद दोनों अलग-अलग कॉलेज में जाने वाले थे आरव को बी.एस.सी करने के लिए दिल्ली जाना था तथा जाह्नवी कंप्युटर साइंस से अपनी ग्रेजुएशन को पूरा करने के लिए लंदन जाने वाली थी

परिणामस्वरूप यह दोनों अपनी मंजिलों के कारण अलग होने वाले थे यह उनके भविष्य के लिए जरूरी था लेकिन उनके बीच सच्ची दोस्ती के कारण वह दोनों एक दूसरे से अलग होने के बारे मे विचार करके थोड़ा चिंतित थे पढ़ाई के लिए अपने-अपने रास्ते जाने से पहले आरव और जाह्नवी मेरठ में एक अंतिम मुलाकात करते हैं

12 कक्षा के बाद जानवी और आरव का अलग होना

जिसमे दोनों दोस्ती में सबसे पहले एक दूसरे को हग करते हैं उसके बाद अपने दिल को हल्का करने के लिए एक दूसरे के साथ हँसी मजाक वाली बाते करते है उसके बाद आरव जाह्नवी को अपने दोस्ती को खास बताते हुए एक पीला फूल देता हैं जिसको जाह्नवी खुशी के साथ स्वीकार करता हैं

12 कक्षा के बाद जानवी और आरव का अलग होना

एक दूसरे के साथ भविष्य को लेकर शिक्षा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें करने के बाद वह दोनों अपनी-अपनी ज़िंदिगी में एक दूसरे के खास होने वाली बात एक दूसरे को बताते हैं तथा बीच-बीच में एक दूसरे के संपर्क में रहने का निर्णय लेते हैं

12 कक्षा के बाद जानवी और आरव का अलग होना

जिसके बाद जाह्नवी गलती से आरव के दिए उस एक फूल को छोड़कर वहाँ से जा रही होती हैं पर आरव उसको रोककर दोस्ती के लिए कुछ अन्य पीले फूल को उसे साथ लेकर जाने के लिए देता हैं जिनको जाह्नवी भावुक होते हुए स्वीकार करती है

ग्रेजुएशन के बाद हुई जाह्नवी-आरव की मुलाकात

ग्रेजुएशन के दौरान जाह्नवी और आरव के बीच बीच-बीच मे थोड़ी बहुत बातचीत होती थी लेकिन वह दोनों पढ़ाई के समय एक दूसरे को अधिक डिस्टर्ब करना पसंद नहीं करते थे लेकिन पास न होने वाली कमी उन दोनों को महसूस होने लगी थी लगभग 3 वर्ष बीतने के बाद जाह्नवी का लंदन से मेरठ आना हुआ

उधर आरव भी अपनी पढ़ाई को पुन करके दिल्ली से मेरठ आ रहा था लेकिन जाह्नवी उससे पहले मेरठ पहुँच गई थी मेरठ आने के बाद जाह्नवी ने सबसे पहले अपने परिवार से मुलाकात की जिसके बाद वह आरव से मिलने के लिए उसके घर पहुँच गई जहाँ उसे पता चला कि आरव शाम 5 बजे तक आने वाला हैं

जाह्नवी द्वारा आरव का इंतेजार किया गया लेकिन पढ़ाई के कुछ महत्वपूर्ण कारण से आरव नहीं आ पाया परिणामस्वरूप जाह्नवी आरव से मिलने के लिए दिल्ली पहुँच जाती हैं जिसके बाद मयूर विहार और त्रिलोकपुरी मे स्थित संजय झील पर दोनों की मुलाकात हुई

ग्रेजुएशन के बाद हुई जानवी-आरव की मुलाकात

उस दौरान जाह्नवी आरव के कंधे पर सिर रखकर, उसके साथ होने के सुकून को महसूस कर रही थी आरव के दिल में भी जाह्नवी के लिए प्यार वाली भावनाए थी एक दूसरे का अच्छा दोस्त होने के कारण आरव ने सीधे और सरल तरीके से जाह्नवी से पूछा कि

जाह्नवी! हम बचपन से अच्छे दोस्त रहे हैं लेकिन अब मुझे लगता है कि हमे यह सब थोड़ा कम करके भविष्य के विषय पर सोचना चाहिए कुछ लोगों द्वारा यह कहते हैं कि अगर लाइफपार्टनर आपका एक अच्छा दोस्त हैं जो भविष्य में सम्पूर्ण जीवन अधिक आरामदायक स्थिति से गुजर जाता हैं

मेरे दिल में तुम्हारे लिए बचपन से प्यार वाला एहसास हैं लेकिन शायद! मैं तुमसे तीन वर्ष दूर रहने के बाद यह बात समझ पाया हूँ हो सकता हैं कि तुम मुझसे प्रेम नहीं करती हो लेकिन अभी यह बाते साफ होना हम दोनों के लिए जरूरी हैं

झील पर आरव के मुँह से यह सब बाते सुनकर जाह्नवी अंदर से बहुत खुश और भावुक होने लगती हैं जिसके बाद वह खड़े होकर आरव के कंधों पर अपने हाथों को रखकर कहती हैं कि

ग्रेजुएशन के बाद हुई जानवी-आरव की मुलाकात

आरव! मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हो तुम इंडिया में थे तुम्हारे पास परिवार था लेकिन मैं वहाँ लंदन में तुम्हारे बिना बिल्कुल अकेली पड़ गई थी पढ़ाई में भी मेरा मन बहुत मुश्किल से लगने लगा था

तुमसे दूर होने के बाद मुझे अपने जीवन में तुम्हारे खास होने की बात पता चली हैं शायद! भगवान ने हमें बचपन में एक दूसरे का होने के लिए ही मिलाया था मुझे लगता हैं कि हमे अपने परिवार वालों से इस विषय पर बात करके विवाह कर लेना चाहिए

आरव यह बात सुनकर अपने घर पर पिता वरुण और माता शिवानी से अपने विवाह के विषय पर बातचीत करता हैं जिसके बाद उसके पिता द्वारा उसके संग जाह्नवी के रिश्ते को लेकर राजीव वर्मा( जाह्नवी के पिता) से बातचीत की जाती है

दोनों परिवार एक दूसरे को बचपन से जानते हैं इसीलिए उनके विवाह में अधिक रुकावट नहीं आती हैं जाह्नवी संग आरव का विवाह जल्द तय हो जाता हैं

जाह्नवी-आरव का खुशहाल जीवन

विवाह होने के बाद जाह्नवी-आरव एक खुशहाल जीवन बिताने लग जाते है उनके बीच बहुत प्यार होता हैं जाह्नवी, आरव के माता-पिता का अच्छे से ध्यान रखती हैं और आरव भी जाह्नवी के परिवार वालों से प्रेम करता हैं आरव अच्छी पढ़ाई के कारण अच्छी जॉब करता हैं

जानवी-आरव का खुशहाल जीवन

जहाँ उसको अच्छी सैलेरी मिलती हैं जाह्नवी भी घर संभालने के साथ साथ ऑनलाइन कार्य करती हैं विवाह के 2 वर्ष बाद आरव जानवी के घर एक छोटा-सा मासूम आरव दुबारा जन्म लेता हैं जिसका नाम उसके माता-पिता द्वारा विहान वर्मा रखा जाता हैं

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