Hindi Mein Kahani: – यह कहानी कानपुर के श्याम नगर से हैं जहाँ माया वर्मा नामक एक महिला अपने एकलौते बेटे वरुण वर्मा के साथ निवास करती थी, उनके सामने वाले घर में किरन रस्तोगी, अपने बेटे कमल रस्तोगी तथा बहूँ पुष्पा रस्तोगी के साथ रहती थी
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महत्वपूर्ण किरदार प्रणाली
| मुख्य किरदार रिश्ता | किरदार नाम |
| माँ | माया वर्मा |
| बेटा | वरुण वर्मा |
| बहूँ | अनुष्का वर्मा |
| पड़ोसन | किरन रस्तोगी |
| पड़ोसन का बेटा | कमल रस्तोगी |
| पड़ोसन की बहूँ | पुष्पा रस्तोगी |
| पड़ोसन का पति | विनीत रस्तोगी |
कहानी का आरंभ – हिंदी कहानी मजेदार?
सुबह का समय हैं बेटा वरुण घर पर उपस्थित हैं माँ, वरुण के लिए नाश्ता बना रही हैं माँ ने वरुण के लिए उसका पसंदीदा नाश्ता ( बेसन चीले, हरी चटनी, बेसन ब्रेड, लाल टमाटर सॉस ) बनाया था वरुण नाश्ता करने के लिए बैठता हैं तभी घर पर घंटी बजने की आवाज सुनाई देती हैं

वरुण दरवाजा खोलने के लिए उठता हैं तभी माँ कहती हैं कि रहने दें बेटा, पहले तू नाश्ता कर ले अन्यथा नाश्ता ठंडा हो जाएगा, मैं दरवाजे पर देखती हूँ कौन हैं? वरुण ने कहा कि नहीं माँ, मैंने एक ऑनलाइन पार्सल मंगाया हैं शायद! वह आया होगा इसीलिए मैं दरवाजे पर जाकर देखता हूँ
फिर वरुण नाश्ता छोड़कर उठा तथा दरवाजा खोलने के लिए चला गया परंतु दरवाजे पर किरन ( माया की पड़ोसन ) थी वरुण ने पड़ोसन किरन को देखकर अपनी माँ को आवाज लागते हुए बातया कि माँ किरन मौसी आई हैं
किरन ने वरुण को दरवाजे से हटाते हुए कहा कि बेटा अपनी मम्मी को आवाज लगाने से पहले मुझे अंदर तो बुला, यह कहकर किरन ने वरुण को हाथ से हल्का सा साइड मे कर दिया और घर मे घुस गई माया का बेटा वरुण, पड़ोसन किरन के बार-बार घर आने एंव खाना मांगने को लेकर चिड़चिड़ा रहता था
उसका मानना था कि पड़ोसन किरन, अच्छे परिवार से होकर भी हमारे घर हर दिन खाने के लिए कुछ न कुछ मांगने आ जाती हैं
किरन के आने पर वरुण की माँ माया रसोई से निकलकर कहती हैं कि किरन जीजी आप, इतनी सुबह-सुबह आइये बैठिए ना
किरन ने कहा कि हाँ, आज रविवार हैं इसीलिए मैं देरी से आई हूँ मुझे लगा कि शायद! तुम सब सो रहे होंगे
माया ने कहा कि बड़ी महरबानी! जीजी आपकी, आप यह बताइए कि क्या खत्म हो गया है आज?
किरन ने हिचकिचाते हुए उत्तर दिया कि थोड़ी चीनी! मैं कटोरी साथ लेकर आई हूँ तुम यह कटोरी भर दो, वो मैंने सोचा कि आज खीर बना दूँ बढ़िया सी! लेकिन रसोई मे मैंने देखा कि चीनी तो खत्म हो गई हैं और कल रात मे मेरा बेटा कमल और बहूँ पुष्पा घर देर से आए इसीलिए वह सो रहे हैं
माया ने कहा कि कोई बात नहीं किरन जीजी! लाइये आप मुझे कटोरी दीजिए मैं आपके लिए चीनी लेकर आती हूँ
किरन ने कहा कि हाँ, लेकिन बढ़िया खुशबू आ रही हैं माया ऐसा नाश्ते मे क्या बनाया हैं तुमने?
माया ने उत्तर दिया कि किरन जीजी मैंने आज वरुण का पसंदीदा नाश्ता बेसन चीले बनाया है
किरन ने कहा – अरे वाह! माया बेसन चीले तो मुझे बहुत पसंद हैं उसके साथ हरी चटनी तो मुझे बहुत पसंद हैं
फिर माया ने पड़ोसन किरन से पूछ लिया कि किरन जीजी खाओगी क्या?
किरन ने जवाब मे कहा कि अरे नहीं माया मैँ तो बस ऐसे ही, चलो अगर तुम इतना जिद करके प्यार से बोल रही हो तो मुझे दो बेसन चीले अपनी प्लेट मे लगाकर दे दो मैं कल प्लेट वापस कर दूँगी
माता – माया और वरुण की परेशानी
यहाँ पड़ोसन किरन हर बार माया के साथ ऐसा करती थी हाँ, यह उसका रोजका कार्य था वह कुछ न कुछ खाने का समान मांगने के लिए माया के घर आ जाती थी और किरन की इस आदत के कारण माया और उसका बेटा वरुण दोनों चिड़ने लग गए थे
फिर एक दिन वरुण अपने माँ ( माया ) से बोला कि माँ वह औरत आपको बेवकूफ बनाती हैं और कुछ न कुछ मांगकर ले जाती हैं आप भोली हैं ना, लेकिन अगर आप एक बार सीधे सीधे उस औरत को मना कर देंगी तब वह दुबारा आपसे कुछ भी लेने की हिम्मत नहीं करेगी

वरुण ने आगे गुस्से मे कहा कि यह आपसे नहीं होगा तब आप मुझे बताइए मैं उस औरत को कल ही अच्छे से समझा देता हूँ
माँ ( माया ) – लेकिन वरुण बेटा किरन जीजी हमारी बहुत पुरानी पड़ोसी हैं और तेरे पापाजी किरन जीजी को बहुत मानते थे यह पहले ऐसी बिल्कुल भी नहीं थी बस जब से विनीत भाईसाहब का देहांत हुआ हैं तभी से किरन जीजी बाबली सी रहती हैं या ऐसा हो सकता है कि घर मे कोई धन संबंधित परेशानी हो?
वरुण ने कहा कि नहीं माँ मुझे नहीं लगता है क्योंकि पति नहीं हैं लेकिन बेटा ओर बहूँ अच्छा कमाते हैं पिछले महीने उन्होंने दिल्ली मे घर खरीदा हैं और क्या किरन मौसी ने आपसे यह कहा है कि हमारे घर मे कोई परेशानी हैं?
माया – अरे नहीं नहीं, वरुण बेटा मुझसे किरन जीजी ने कभी कुछ नहीं कहा है बल्कि वह अपने बेटे एंव बहूँ की तारीफ करती हैं अच्छा चल अब टॉपिक बदलते हैं तू सबसे पहले मुझे यह बता कि तू अपने ऑफिस से छुट्टी कब लेने वाला हैं क्योंकि अनुष्का को तेरे साथ शॉपिंग करने जाना हैं उसका मुझे फोन आया था
वरुण ने हल्का मुसकुराते हुए कहा कि माँ, आप और अनुष्का दोनों शॉपिंग पर चले जाओ, मुझे ऑफिस मे बहुत काम हैं, मैं छुट्टी नहीं कर सकता हूँ प्लीज आप अनुष्का को अपने साथ चलने को कह दीजिए ये लीजिए आप मेरा क्रेडिट कार्ड रख लीजिए आप जितना भी पेमेंट हो इस कार्ड से कर देना

यहाँ अनुष्का, वरुण की होने वाली पत्नी हैं वरुण और अनुष्का दोनों एक दूसरे को कॉलेज से पसंद करते हैं, यह दोनों जल्द एक दूसरे के साथ शादी करने वाले हैं यही करणं हैं कि यहाँ वरुण ओर अनुष्का के विवाह की शॉपिंग की बात चल रही हैं
माया भी अपने बेटे वरुण ओर बहूँ अनुष्का के रिश्ते से बहुत खुश हैं माया की होने वाली बहूँ अनुष्का बहुत अधिक सुलझी हुई एंव समझदार लड़की थी
पुन: फिर घंटी बजी – ट्रिन-ट्रिन
फिर एक दिन घर के दरवाजे पर घंटी बजती हैं वरुण की माँ माया दरवाजा खोलने के लिए जाती हैं और देखती हैं कि पड़ोसन किरन आई हैं

किरन – अरे माया तुम्हारे घर पर नई बहूँ के स्वागत की तैयारिया कैसी चल रही हैं? और तुम कैसी हो? सब अच्छा चल रहा है ना?
माया ने उत्तर देते हुए कहा कि हाँ, किरन जीजी मैं ठीक हूँ और वरुण-अनुष्का की शादी की तैयारियाँ बहुत अच्छे से चल रही हैं अधिकतर कार्य तो बहूँ अनुष्का ने संभाल लिए हैं क्योंकि वरुण तो ऑफिस कार्य मे व्यस्त रहता हैं
किरन ने कहा कि अच्छी बात हैं माया, तुम्हारे पास थोड़ा गुड मिल सकता हैं क्या?
माया ने कहा – हाँ, रखा हैं लेकिन वह पुराना हो गया हैं
किरन ने कहा कि माया फिर वह पुराना गुड तुम्हारे किसी काम का नहीं होगा लाओ वह पुराना गुड तुम मुझे दे दो
वास्तव मे पुराने पड़ोसी होने के कारण माया, किरन को पड़ोसी कम अपनी बड़ी बहन अधिक मानती थी लेकिन किरन द्वारा हर रोज बार-बार कुछ न कुछ मांग लेने से माया भी परेशान थी हाँ, वरुण-अनुष्का के विवाह के बाद, घर में बहूँ की सत्ता का आरंभ होने वाला था
क्योंकि वरुण और अनुष्का के विवाह के बाद, रसोई का अधिकतर कार्य अनुष्का द्वारा होने वाला था
वरुण-अनुष्का विवाह
अब यहाँ वरुण और अनुष्का का विवाह हो जाता हैं लेकिन फिर एक दिन पड़ोसन किरन माया के घर आ जाती हैं ओर कहती हैं कि कहाँ हो माया तुम? बहूँ से क्या खाने मे क्या बनवाया हैं

बहूँ ( अनुष्का ) ने कहा कि राजमा चावल बनाए हैं मौसी जी क्या आपके लिए लेकर आऊँ?
किरन – हाँ-हाँ बहूँ तुम्हारे हाथ का पहला खाना हैं और राजमा तो मुझे बहुत अच्छा लगता हैं इसीलिए एक प्लेट में लेकर आ जाओ
इतना सुनने के बाद बहूँ अनुष्का ने एक प्लेट मे राजमा चावल किरन मौसी के लिए लगा दिए और उनको दे दिए उन राजमा चावल को पड़ोसन किरन ने खतम कर दिया और कहा अरे वाह! बहूँ कितना अच्छा खाना बनाया हैं
तुमने, राजमा तो बहुत स्वादिष्ट हैं जुग-जुग जियो! तुम ऐसा करो बहूँ राजमा एक कटोरी मे मुझे दे दो
अनुष्का ने कहा कि जी, मौसी जी मैं अभी लेकर आई
अब अनुष्का के लिए पड़ोसन किरन द्वारा ऐसे मांगना प्रथम बार था लेकिन कुछ दिनों बाद, अनुष्का ने अपने पति वरुण से कहा कि सुनो जी, यह किरन मौसी को क्या परेशानी हैं वह रोजाना कुछ न कुछ लेने के लिए आ जाती हैं क्या उनके घर मे कोई समस्या हैं

वरुण ने अनुष्का से कहा कि अरे नहीं-नहीं मुझे लगता है कि वो एक लालची औरत हैं उनका बेटा ओर बहूँ दोनों अच्छा कमाते हैं फिर ऐसे में उनको क्या परेशानी होगी रोजाना कुछ न कुछ मांगना उनकी आदत बन गया हैं मम्मी तो उनके चक्कर मे हर बार आ जाती हैं लेकिन तुम उनसे सतर्क रहो
तुम उनके चक्कर मे मत पड़ना, उन्हे सीधे-सीधे मना करना उस समय वरुण के मुँह से किरन के लिए यह सब सुनकर अनुष्का को अच्छा नहीं लगा वह समझ गई थी कि यहाँ कुछ गड़बड़ हैं इसीलिए अनुष्का ने वरुण से कुछ नहीं कहा और वहाँ से चुप-चाप चली गई
अगले ही दिन दुबारा किरन मौसी माया के घर आई और कहा कि अरे माया, कहाँ हो बहूँ अनुष्का
अनुष्का ने उत्तर दिया कि मौसी जी, मम्मी जी अपने कमरे मे आराम कर रही हैं, वो उनकी थोड़ी तबयेत खराब हैं ना, आपको कोई महत्वपूर्ण काम होगा तो मैं मम्मी जी को बुलाकर लाती हूँ
किरन ने कहा कि नहीं-नहीं बहूँ, माया को आराम करने दो मुझे तो बस थोड़ा-सा सरसों का तेल चाहिए था कोई बात नहीं मैं बाद मे आ जाऊँगी
अनुष्का ने कहा कि रुकिए मौसी जी मैं आपके लिए सरसों का तेल लेकर आती हूँ
यहाँ बहूँ अनुष्का ने किरन मौसी के द्वारा लाई गई बोलत में उनको सरसों का तेल दिया जिसके बाद वह उस सरसों का तेल को लेकर घर चली जाती हैं
किरन के बेटा-बहूँ का व्यवहार
सरसों का तेल लेकर जब पड़ोसन किरन अपने घर पहुँचती है तब वह चुले पर खाना बना रही होती है तभी किरन के बहूँ-बेटा उसके पास आते हैं तथा किरन की बहूँ पुष्पा ने कहा कि कमल यह देखो ये बुढ़िया दुबारा किसी के घर से कुछ मांगकर लेकर आई हैं अरे भगवान! इस बुढ़िया ने तो पूरे मोहल्ले में हमारी नाक कटवा रखी हैं

किरन ने कहा कि बहूँ पुष्पा नहीं मांगु तो मैं क्या करू? मेरी बहूँ और बेटा मुझे खाने के लिए राशन या खाना देते नहीं हैं
पुष्पा ने कहा कि नहीं तो हमने क्या पूरे जीवन का ठेका लिया हैं तुम्हारा, हमने तुम्हें रहने के लिए छत दी हैं वह काफी नहीं हैं तुम्हारे लिए, यह बात तुम हमेशा याद रखना, तुम्हारे पति अपनी बीमारी के ऊपर अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर चले गए हैं यह घर और हमारे पास जो भी हैं वह कमल ओर मेरी कमाई से हैं
किरन ने रोते हुए कहा कि क्या मैं तुम्हारी कुछ लगती नहीं हूँ बेटा कमल?
कमल ने बोला कि माँ, अब मैं तुम्हें क्या बोलू? मैं तुम्हें कितने समय से बोल रहा हूँ कि तुम्हें हम किसी अच्छे वृद्ध आश्रम छुड़वा देते हैं लेकिन तुम मेरे बात नहीं सुन रही हो इससे हम तीनों खुश रह सकते हैं लेकिन हाँ, तुम्हें मेरी बात समझमे नहीं आएगी
किरन ने कहा कि हाँ, तू एकदम सही बोल रहा है बेटा कमल, शायद! मैं ही गलत हूँ मुझे लगता रहा कि इस मोहल्ले मे तुम दोनों को कोई बुरा ना कहे इसीलिए मैंने कभी अपने घर मे क्या चल रहा हैं किसी को पता चलने नहीं दिया लेकिन आज लगता हैं कि बेटा कमल तू शुरू से सही था ठीक हैं
फिर बेटा, अगर तुम दोनों का यही फैसला हैं बहूँ ने बोल दिया है कि यह मेरा घर नहीं हैं तब मैं यहाँ रहकर क्या करूँगी
यहाँ किरन, कलम और पुष्पा को यह पता नहीं होता हैं कि माया और उसकी बहूँ अनुष्का दोनों ने सबकुछ सुन और देख लिया हैं माया ने पड़ोसन किरन से कहा कि किरन जीजी अब से आप अनुष्का, वरुण और मेरे साथ रहेंगी अच्छा हुआ मैं बहूँ अनुष्का के कहने पर आपके पीछे पीछे चली आई
किरन – अरे अनुष्का, माया तुम दोनों यहाँ
माया – हाँ किरन जीजी, मैं यहाँ, और अब से हमारा घर आपका भी हैं, लेकिन जीजी आपके मुझे कभी कुछ बताया क्यू नहीं?
किरन रोते हुए अनुष्का और माया को कहती हैं कि माया, मैं क्या बताती तुम्हें? कि मेरी बहूँ और बेटा दोनों मुझे एक समय का खाना भी नहीं दे पाते हैं और इसी कारण मैं तुमसे कभी कुछ, कभी कुछ मांग-मांगकर खाती हूँ मैं यह सब किस तरह बताती तुम्हें माया?
यहाँ मेरी पालन पोसन मे कमी हैं माया, जिसका मुझे अंजाम भुगतना होगा, मेरे परिवार को मेरी फिक्र नहीं हैं माया, मेरा बेटा मुझे वृद्ध आश्रम भेजना चाहता हैं
अनुष्का ने कहा कि नहीं, मौसी जी यहाँ आप गलत नहीं हैं और जो गलत हैं भगवान उनको उसकी सजा जरूर देगा आप वृद्ध आश्रम नहीं हमारे साथ, हमारे घर चलिए मैं हूँ ना, आपको खाना मैं अपने हाथों से बनाकर खिलाऊँगी
किरन ने कहा कि माया, तुम्हारी बहूँ हीरा हैं! लेकिन अनुष्का बहूँ मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकती हूँ मैं तुम्हारे और वरुण बेटा के ऊपर बोझ बनना नहीं चाहती हूँ और वरुण बेटा क्या सोचेगा
अनुष्का ने कहा कि मौसी जी, आप वरुण को समझाने का काम मुझपर छोड़ दीजिए और वह मेरे बिना कुछ कहे मान जाएंगी, क्या आपको अपनी अनुष्का बहूँ पर भरोसा नहीं हैं?
किरन ने कहा कि नहीं अनुष्का बहूँ! ऐसा नहीं हैं लेकिन..

इतना कहने के बाद अनुष्का ने किरन मौसी को तुरंत गले लगाया और वह उनको कमल और पुष्पा के घर से लेकर जाने लगी, किरन मौसी ने पीछे-मुड़कर एक बार भी अपने बेटे ( कमल ) और बहूँ ( पुष्पा ) को नहीं देखा
ऐसा करने के बाद अब किरन ने अपनी ज़िंदिगी को पूरे आत्मसम्मान के साथ जीने का निर्णय लिया और वह वरुण, अनुष्का और माया के साथ उनके परिवार में खुशी-खुशी रहने लगी

नमस्ते! मैं नितिन सोनी कई वर्षों से इंटरनेट पर एक लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूँ मुझे मजेदार कहानियाँ, शायरियाँ और रिश्तों संबंधित अन्य लेखों को शेयर करना अच्छा लगता हैं मेरे द्वारा एनएस Quotes मंच पर अनेक उपयोगी आर्टिकल को शेयर किया जाता हैं लेखक के साथ-साथ मैं इस ब्लॉग का फाउन्डर भी हूँ मेरा यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! दुबारा भी आए
