मजेदार कहानी हैं क्या? सरसों का सांग और बाजरे की रोटी – 2026 छोटी कहानी इन हिंदी

Stories in Hindi: – यह मजेदार कहानी किन्नौर जिलें के कल्पा नामक गाँव की हैं कल्पा, में एक मध्य वर्गीय परिवार रहता था जिसमें कृष्णा ठाकुर ( मुखिया ), धर्मपत्नी पदमा, पुत्र राहुक एंव माँ गायत्री देवी रहती थी

महत्वपूर्ण किरदार प्रणाली

मुख्य किरदार रिश्ताकिरदार नाम
माँगायत्री ठाकुर
बेटाकृष्णा ठाकुर
बहूँपदमा ठाकुर
पड़ोसनदिव्या राजपूत
पदमा का बेटाराहुल ठाकुर
कृष्णा का दोस्तमहेशा कुमार
गाँव का नामकल्पा

 

कहानी का आरंभ – मजेदार कहानी हैं क्या?

यह कल्पा गाँव में घनी सर्दियों का समय हैं सतलुज नदी की घाटी में स्थित यह गाँव भारत मे अत्यधिक ठंड के लिए जाना जाता हैं एक दिन हड्डियों तक उतने वाली ठंड, कल्पा गाँव में पड़ रही थी, ठंड के कारण बाहर इतना अधिक कोहरा था कि हर व्यक्ति धूधला दिखाई दे रहा था

मजेदार कहानी हैं क्या? सरसों का सांग और बाजरे की रोटी - 2026 छोटी कहानी इन हिंदी

कृष्णा के घर उसकी पत्नी पदमा ठंड में सुबह-सुबह सो रही हैं लेकिन मुर्गे की बांग के कारण वह नींद से उठ जाती हैं और कहती हैं कि हे भगवान!, पाला-सा पड़ रहा हैं, इतनी ठंड, आज मेरा क्या होगा? ( वह कांप रही हैं )

सुबह हो गई हैं पदमा बिस्तर को छोड़कर, परिवार के लिए खाना बनाने के उद्देश्य से, रसोई की तरफ जाने लगती हैं पदमा रसोई मे कढ़ाई, मिट्टी के चूल्हे, बर्तन, एंव लकड़ियों को देखकर काँपते हुए बोलती हैं कि अगर भगवान द्वारा यह पेट नहीं बनाया गया होता तो हमे भूख लगने पर, इतनी ठंड मे कोई काम नहीं करना पड़ता..

तभी पदमा की सास ( गायत्री ) ठंड मे कुड़कुड़ाती हुई आवाज के साथ, अंदर कमरे से बोलती हैं कि बहूँ आज ठंड को क्या हो गया हैं? तू उठ गई हैं क्या? इतनी ठंड में सरसों का साग और बाजरे की रोटी बन जाए तो शरीर में गर्मी आ जाए

पदमा की सास ठंड में बिस्तर हैं

पदमा ने उत्तर दिया कि हाँ, माँजी मैं उठ गई हूँ, मैं सरसों का साग और बाजरे की रोटी बना दूँगी लेकिन ठंड में पहले मैं आपके लिए एक कप चाय गुड वाली बना देती हूँ

गायत्री ने बहूँ ( पदमा ) से कहा कि अरे वाह! बहूँ ठंड में गुड वाली चाय पीकर बहुत आनंद आएगा, आज तेरे हाथों का सरसों का साग और बाजरे की रोटी बनेगी मुझसे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा हैं, तू एक काम कर चाय बनाने के बाद जल्दी से खाना बना दें और हाँ अदरक-लहसुन वाली चटनी भी बनाना। ठंड में यह देशी नाश्ता गाँव वाला नहीं खाया तो हमने क्या खाया?

पदमा ने कहा कि हाँ माँजी, लेकिन जब पिछले साल, शहर से रज्जो काकी की बहूँ, गाँव में आई तब उसको गाँव वाला सरसों का साग और बाजरे की रोटी अच्छा नहीं लगा था ऐसा क्यों?

गायत्री ने उत्तर दिया कि शहर वालों को अब सरसों का साग और बाजरे की रोटी क्या अच्छी लगेगी वो मोहे तो, सब बर्गर-मोमोज में लगे रहते हैं अब उन्हे कौन समझाए कि बर्गर-मोमोज सेहत के लिए खराब हैं अच्छा बहूँ! तू एक काम करना मेरे लिए छ-सात रोटी बना देना

पदमा ने कहा कि अरे मम्मीजी! क्या आप छ-सात रोटीयाँ खा भी लेंगी

गायत्री ने कहा कि बहूँ तू मेरे खाने को नजर बिल्कुल मत लगा, मैं तो कमजोरी महसूस करती हूँ आजकल!

तभी बहूँ पदमा जोर-जोर से हँसती हुई गुड वाली चाय एंव नाश्ता बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे में लकड़ियाँ डालकर उसको जलाती हैं जिसके बाद ठंड में सुन हुए उसके हाथ-पैर सही हुए, उसने चाय बनाकर अपनी सास गायत्री को दी लेकिन बाजरे का आटा गुथने के लिए उसको ठंडे पानी मे हाथ देने पड़े

उस दौरान पदमा ने खुद से कहा कि राम! राम! राम! राम, यह पानी कितना ठंडा हैं मेरे हाथों में एकदम करंट सा लगा है परंतु फिर भी पदमा सरसों के आटे  को कपकपाती हुई गूथती हैं

यहाँ पर रसोई मे पदमा का एकलौता बेटा राहुल आता हैं तथा स्कूल न जाने के लिए माता ( पदमा ) से कहने लगता हैं पदमा बेटे ( राहुल ) से हँसते हुए कहने लग जाती हैं कि राहुल बेटा देखो मैं आपके लिए ठंड में सरसों का साग बना रही हूँ

यह कहकर तुम्हारी सारी ठंड भाग जाएगी और ठंड आज बहुत ज्यादा हैं स्कूल मत जा, लेकिन कल जाकर पूरा काम कर लेना

पदमा का बेटा राहुल

राहुल ने कहा कि हाँ-हाँ माँ कल मैं सारा काम पूरा कर लूँगा लेकिन आज इतनी ठंड हैं कि मेरे हाथ पैर जम रहे हैं माँ, शहर के लोग सर्दियों में ब्रेड-ऑमलेट वाला नाश्ता करते हैं मेरा वो दोस्त हैं ना? पीयूष! उसके चाचा का लड़का, वह शहर से आया था लेकिन उसने जब हमारे गाँव का साग खाया तब उसका स्वाद एकदम बदल गया

पदमा ने कहा कि राहुल बेटा, शहरों में लोग खाते होंगे ब्रेड-ऑमलेट लेकिन तुझे तो पता हैं सरसों के साग और बाजरे की रोटियों मे जो मजा हैं वह और किसी मे नहीं हैं

यहाँ बाते करते करते पदमा नाश्ते की सभी शुरुआती तैयारियाँ करके सरसों के साग को उबलने के लिए चूल्हे पर रख दिया था फिर जैसे ही पदमा ने अपने सरसों के साग में मक्के का आटा, लहसुन, हरी मिर्च डाला तब उसकी खुसबू पूरे घर मे फैलने लगी

पदमा का पति कृष्णा घर आया

तभी पदमा का पति कृष्णा घर पर आ जाता हैं कृष्णा, कल्पा गाँव में खेती करता हैं जिसके कारण वह रोजना सुबह-सुबह काम करने के लिए चला जाता हैं कृष्णा घर में फैल रही खुशबू के कारण अपनी पत्नी पदमा से कहता है कि वाह! क्या खुशबू हैं लग रहा है कि आज घर पर ठंड में दावत हैं

पदमा ने मुसकुराते हुए कहा कि जी आप आ गए! आप हाथ-पैर धो लीजिए जल्दी से मैं आपके लिए खाना लगा देती हूँ

इतना सुनने के बाद कृष्णा हाथ-पैर धोकर, अपनी माँ गायत्री, बेटे राहुल के साथ रसोई मे खाना खाने के लिए बैठ गया

कृष्णा ने कहा कि पदमा, आज काम करते समय खेतों में ठंड नहीं लगी लेकिन बाहर आज बहुत ज्यादा ठंड हैं बर्फ पड़ रही हैं जब मैं खेतों से काम करके निकला तो घर तक आने में ठंड हड्डियों मे ऐसे घुस गई मानो हाथ-पैर रास्ते में ही जमा देगी

पदमा कहती हैं कि जी मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि गाँव में ठंड बहुत पड़ रही हैं आप कुछ दिन छुट्टी पर रहिए आप मेरी बात सुनते नहीं हैं

कृष्णा ने कहा कि अरे भाग्यवान! खाने के लिए तो कमाना पड़ेगा ना, अच्छा तुम यह बताओ कि इतनी अच्छी खशबू! क्या बनाया हैं तुमने? सरसों का साग और बाजरे की रोटी.. क्या तुम्हें पता हैं पदमा मैं सरसों के साग और बाजरे की रोटी के लिए, जब शहर कार्य करता था तब बहुत तरस जाता था

पदमा ने कहा कि हाँ, जी आज मैंने आप सभी के लिए खाने मे सरसों का साग और बाजरे की रोटियाँ बनाई हैं मैं आपको खाना परोस देती हूँ

पदमा द्वारा बनाया गया सरसों का साग उसका पति कृष्णा, बेटा राहुल और सास गायत्री खाती हैं

यहाँ पदमा अपने सभी परिवार वालों को गरम गरम बाजरे की रोटी, सरसों के साग और लहसुन की चटनी के साथ परोसने लग जाती हैं रोटियाँ मक्खन लगी हुई थी, कृष्णा, राहुल और गायत्री ने आनंद लेते हुए नाश्ता किया घर के बाहर बर्फ वाली बारिश हो रही हैं

घर के बाहर, आँगन तथा छत पर बर्फ की चादर थकी हुई थी तभी वहाँ पदमा के घर पड़ोस में रहने वाली दिव्या आंटी, चूल्हे के लिए कुछ लकड़ियाँ लेने के उद्देश्य से आई दिव्या आंटी ने आवाज लगाते हुए कहा कि हें पदमा बहूँ! कहाँ हो, घर मे कोई हैं क्या?

पदमा दरवाजा खोलने के लिए उठी, उसने दरवाजा खोलते ही दिव्या आंटी को देखा और कहा कि अरे दिव्या आंटी आप! बर्फ पड़ रही हैं और आप बाहर घूम रही हैं? बताइए क्या काम हैं?

दिव्या आंटी कापते हुए कहा कि पदमा बहूँ! ठंड अधिक हैं लेकिन तुझे मालूम हैं ना, कई दिनों से रोजाना कोहरा हैं ऐसे में मैं लकड़ियाँ लेने के लिए जंगल नहीं जा पा रही हूँ इसीलिए मेरे घर में चूल्हे के लिए कम लकड़ियाँ बची हैं परंतु मुझे याद हैं

तेरे पास जलाने के लिए लकड़ियाँ हैं पिछली बार तूने बहुत सारी लकड़ियाँ जमा की हुई थी अब मैं बूढ़ी हो चुकी हूँ बेटा! इसीलिए पिछली बार अधिक लकड़ियाँ चूल्हे के लिए जमा नहीं कर पाई मुझे लगता है कि तेरी रसोई में चूल्हा जल रहा हैं खुशबू बहुत बढ़िया आ रही हैं क्या बनाया हैं घर पर आज?

पदमा ने कहा कि दिव्या आंटी मैंने आज सरसों का साग और बाजरे की रोटियाँ बनाई हैं आप आइये ना बैठिए मैंने आपके लिए भी नाश्ता लगा देती हूं

पदमा के हाथों का सरसों का साग खाने के लिए दिव्या आंटी आती हैं

बस साग और रोटियों का नाम सुनते ही पड़ोसन दिव्या के मुँह में पानी आने लगा वह खुद को खाए बिना नहीं रोक सकती थी ऊपर से ठंड बहुत अधिक थी इसीलिए दिव्या पदमा बहूँ के कहने पर खाना खाने के लिए बैठ गई

दिव्या ने सरसों के साग और बाजरे की रोटियों का लुप्त उठाते हुए छ रोटियाँ एक के बाद एक खाई जिसके बाद उसने बोला कि पदमा बहूँ तेरे हाथों मे जादू हैं खाने में बहुत आनंद आया हैं भगवान तुझे हमेशा खुश रखे बहूँ!

गायत्री ने कहा कि अरे दिव्या! मेरी बहूँ के हाथों मे स्वाद तो होगा ही आखिर बहूँ किसकी हैं?

दिव्या ने गायत्री को उत्तर देते हुए कहा कि मुझे पता हैं गायत्री! कि बहूँ तेरी ही हैं लेकिन पदमा को सबसे पहले मैंने अपने बेटे के लिए पसंद किया था, लेकिन वो शहर से नंदिनी को लव मेरिज करके लेकर आया, मेरे बेटे का ही नसीब खाराब निकला, उसको हीरे की परख नहीं थी, तुझे पता हैं

गायत्री मेरी बहूँ नंदिनी को केवल पराठे बनाने आते है वह शहर से हैं ना, इसीलिए उसको सरसों का साग और बाजरे की रोटी बनानी नहीं आती है सच कहूँ तो मैंने लकड़ियों का बहाना लेकर पदमा बहूँ के हाथ का नाश्ता करने के लिए ही आई थी मेरे बहूँ तो ब्रेड-ऑमलेट और पोहा बनाती हैं उसको खाने मे वो स्वाद नहीं हैं

कृष्णा ने हँसते हुए उत्तर दिया कि तो दिव्या आंटी आपका झूठ पकड़ा गया, आप लकड़ियों के बहाने से, पदमा के हाथों का नाश्ता खाने के लिए आई थी

यहाँ सब हंसने लगते हैं फिर दिव्या कहती हैं कि पदमा बहूँ! अब तेरा नाश्ता ही ऐसा हैं मैं क्या करू? यह कहकर दिव्या अपने घर लौट जाती हैं

पदमा ने अपने पति कृष्णा से कहा कि जी सुनिए, पीने का पानी खतम हो गया हैं, मैं थोड़ा सा पानी भरकर लेकर आती हूँ, बस अभी आई

कृष्णा ने उत्तर दिया कि अरे भाग्यवान! ठीक हैं लेकिन जगह-जगह बाहर बर्फ हैं तुम संभलकर जाना, मैं एक काम करता हूँ मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ

पदमा ने कहा कि नहीं जी, ठंड बहुत हैं! आप अभी बाहर से आए हैं मैं आराम से जाऊँगी आप बिल्कुल परेशान न हो, बस मुझे दस मिनट ही लगेंगे

पदमा मटके मे पानी भरने के लिए जाने लगती है

बस पदमा, पति कृष्णा से इतना कहकर, पानी भरने के लिए मटका उठाकर चली जाती हैं, ठंड के मौसम मे बाहर सभी जगह बर्फ जमी हैं रास्ता बर्फ से ढका हैं चलने वाली हवा ठंड में इतनी अधिक तेज हैं ऐसा लगता हैं कि वह चेहरे पर चाटा मार रही है पदमा सभलकर चल रही हैं

लेकिन गलती से उसकर पैर बर्फ पर फिसल जाता हैं वहाँ जल से भरी नदी होने के कारण पदमा उसमें गिर जाती हैं

घर पर पदमा का पति कृष्णा, पदमा के लौटने की राह देख रहा हैं लेकिन पदमा को लौटने मे अधिक समय होने पर, वह पदमा को ढूँढने के लिए बाहर जाता हैं बहुत ढूँढने पर पदमा उसको नहीं मिलती है वह एक आदमी को से पदमा के विषय पर पूछता हैं

तब उसको पता चलता हैं कि उसकी बीवी पदमा उस पहाड़ी से नीचे नदी मे गिर गई हैं जिसके बाद वह अपनी पत्नी को ढूँढने के लिए नदी तरफ जाता है बहुत ढूँढने पर उसको पदमा नहीं मिलती हैं

पदमा को गायब हुए धीरे-धीरे एक साल बीत जाता हैं परिवार उसको मारा हुआ समझने लगता हैं कृष्णा, पदमा के जाने के बाद खेती छोड़कर, एक नौकरी करने लगता हैं वह किसी कारखाने में मजदूर की तरह कार्य करने लगता हैं

पदमा के जाने के बाद कृष्णा का मन परेशान-सा रहने लगता हैं वह केवल अपने बच्चे राहुल के लिए मेहनत करता हैं एक दिन उसके घर लौटने पर शाम को राहुल, कृष्णा से कहता हैं कि पापा, मैंने आपसे कुछ नोटबुक मँगवाई थी क्या आप वह लेकर आए हैं?

कृष्णा ने उत्तर देते हुए कहा कि हाँ, बेटा मैं लेकर आया हूँ! तू कुछ मँगवाए और मैं ना लाऊँ ऐसा कभी नहीं हो सकता हैं बेटा,

गायत्री, कृष्णा से कहती है कि बेटा कृष्णा! तू खाना खाने के लिए हाथ-पैर धोकर आजा, मैं तुम दोनों के लिए खाना लगाती हूँ आज आलू सोयाबीन बनाई हैं

माँ के द्वारा यह कहने पर कृष्णा और राहुल दोनों खाना खाने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन गायत्री खाते समय कहती हैं कि बेटा कृष्णा, बहूँ पदमा के जाने के बाद से साग और बाजरे की रोटियाँ खाने का मन नहीं करता हैं बहूँ के हाथों का खाना भूख नहीं, मन को शांत करता था

ऊपर वाले ने हमारे परिवार के साथ यह सबकुछ ठीक नहीं किया हैं, बेटा कृष्णा, राहुल अभी छोटा हैं मुझे लगता है कि तुझे दूसरी शादी के ऊपर विचार करना चाहिए आखिर! राहुल को दूसरी मम्मी की अधिक जरूरत हैं

कृष्णा की माँ गायत्री उसको दूसरी शादी करने के लिए कहती हैं

कृष्णा ने उत्तर मे कहा कि माँ नहीं ! मैं पदमा की जगह अपने जीवन में किसी ओर को नहीं देता सकता हूँ जो राहुल और मेरे नसीब में था वो हमारे साथ हुआ, हम उसको चाहकर भी टाल नहीं सकतें थे राहुल के लिए मैं हूँ ना, धीरे-धीरे राहुल बड़ा होगा, समझदार होगा..  तब मुझे समझेगा

लेकिन मैं अपनी पदमा की जगह किसी और को नहीं देना वाला हूँ, और मुझे लगता है कि वो हैं माँ, वो हैं..

इतना कहकर वह बिना टिफिन लिए काम करने के लिए फैक्ट्री चला जाता हैं जहाँ उसका बेस्ट फ्रेंड महेश, खाना खाने के लिए टिफिन को खोलता हैं और कृष्णा से खाना खाने के लिए कहता हैं अरे मेरे भाई कृष्णा! आओ खाना खाते हैं

कृष्णा का मन खाना खाने के लिए नहीं था लेकिन उसको खाने की  खुशबू जानी पहचानी लग रही थी लेकिन कृष्णा ने अपने मित्र महेश से कहा कि नहीं भाई, तू यह खाना खा ले, मैं नहीं खाऊँगा

महेश ने कहा कि भाई मेरी बहन ने बहुत अच्छा साग बनाया हैं आओ खाते हैं?

महेश के जिद करने पर कृष्णा खाना खाने के लिए बैठता हैं तभी उसको पता चलता है कि यह सास और उसकी खुशबू एकदम, उसकी पत्नी पदमा वाली हैं तभी वह अपने मित्र महेशा से पूछता है कि महेश भाई! क्या सच मे यह तेरी बहन ने बनाया हैं और उसको अपनी पत्नी पदमा की फोटो दिखाता हैं

कृष्णा ने महेश को अपनी पत्नी पदमा की फोटो दिखाई

महेशा फोटो देखने पर बोलता है कि अरे यह मेरी बहन हैं तेरे पास फोटो कैसे? 

कृष्णा कहता है कि यह मेरी पत्नी पदमा हैं, जो लगभग एक वर्ष पहले नदी में गिर गई थी

महेशा कहता है कि हाँ यह मुझे एक साल पहले नदी के किनारे बेहोशी मे मिली लेकिन इसको कुछ याद नहीं हैं मेरे पास बहन नहीं हैं इसीलिए मैंने इसको अपने घर रखा हैं तुम मेरे साथ चलो शायद! बहन पदमा को कुछ याद आ जाए

यहाँ महेशा, कृष्णा को पदमा बहन से मिलवाने के लिए अपने घर जाने लगता हैं घर पहुँचने के बाद पदमा ने जब कृष्णा को देखा तब उसको सब कुछ याद आने लगा वह कृष्णा को गले लगाकर रोने लगी कृष्णा और पदमा को महेशा ने मिलवा दिया

पति कृष्णा से मिलकर पदमा को सब कुछ याद आ जाता है

महेश खुद अपनी बहन पदमा को, कृष्णा के घर छोड़ने के लिए आया, पदमा अपने बेटे राहुल और सास से मिलकर बहुत खुश थी उसने राहुल पर अपना प्यार लुटाया तथा माँ गायत्री के गले लगकर रोने लगी

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