Desi Story in Hindi: – यह सुन्दर देसी कहानियाँ उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत शहर हल्द्वानी से हैं घर की मुखिया वैशाली, हल्द्वानी के पीलीकोठी में रहती हैं उसके घर मे उसका एक बेटा परवीन और पति अरुण रहता हैं देसी कहानी (Desi Kahani) मे परवीन का विवाह, जानवी के साथ होता हैं
महत्वपूर्ण किरदार प्रणाली
| मुख्य किरदार नाम | वैशाली |
| पति का नाम | अरुण |
| बेटे का नाम | परवीन |
| बहूँ का नाम | जानवी |
| जानवी का गाँव | फफूँदा ( जिला – मेरठ ) |
| जानवी का भाई | गौरव |
| जानवी के पिता | राकेश |
| जानवी की माता | काव्या |
देसी कहानियाँ आरंभ होती हैं –
उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में वैशाली नामक औरत पीलीकोठी पर रहती थी उसके घर में उसका बेटा अच्छा कमाता था तथा परिवार में उसका पति अरुण, बेटा परवीन और वह खुद, केवल तीन सदस्य थे वैशाली खुद को अधिक सुलझी हुई मानती थी

उसका परिवार पूर्ण रूप से शिक्षित था, बेटा अधिक पढ़ा लिखा था, जिसके परिणामस्वरूप वह अच्छी सोसाइटी में मॉर्डन तरीके से रहते थे वैशाली ने अपने बेटे परवीन को अच्छी-अच्छी बाते सिखाती थी इसीलिए वह एक अच्छा संस्कारी बेटा था एक दिन वैशाली अत्यधिक खुश थी
यहाँ उसकी खुशी का कारण, बेटे परवीन का विवाह तय करना था अब परवीन उसका एकमात्र बेटा था लेकिन वैशाली अपने बेटे परवीन का विवाह गाँव की अच्छी लड़की से करवाना चाहती थी उसका बेटा परवीन माँ वैशाली की इच्छा से शादी करने के लिए सहमत था
वैशाली ने उत्तर प्रदेश के फफूँदा गाँव में रहने वाली लड़की जानवी से अपने पुत्र परवीन का विवाह तय किया फफूँदा मेरठ जिलें का एक गाँव हैं वह जनवी को देखने के लिए उसके गाँव फफूँदा चली जाती हैं यहाँ फफूँदा की जानवी एक अच्छी लड़की हैं
उसके परिवार में उसका छोटा भाई गौरव, पिता राकेश और माँ काव्या हैं यह फफूँदा गाँव का एक नामी परिवार हैं जानवी को देखने के बाद, जानवी वैशाली को पसंद आ जाती हैं जिसके बाद वह परवीन और जानवी का विवाह पक्का कर देते हैं
परवीन और जानवी का विवाह
लगभग 14 दिनों बाद जानवी और परवीन का विवाह हो जाता हैं वैशाली अपनी बहूँ जानवी तथा बेटे के साथ अपने घर हल्द्वानी आ जाती हैं जहाँ वैशाली द्वारा, बहूँ जानवी का गृह प्रवेश किया जाता है, गृह प्रवेश के समय जब जानवी, वैशाली के बड़े और मॉर्डन घर को देखती रह जाती हैं

क्योंकि जानवी गाँव की लड़की हैं उसने ऐसा मॉर्डन घर जीवन मे पहली बार देखा होता हैं वह कहती हैं कि अरे यह कैसा अद्भुत घर हैं? हमारे गाँव में जमींनदारों की हवेली भी इतनी बड़ी नहीं होती हैं
वैशाली बहूँ जानवी से कहती हैं कि बहूँ जानवी अब यह सबकुछ तुम्हारा भी हैं, क्योंकि अब तू हमारे घर की लक्ष्मी हैं तुझे सब कुछ संभालना हैं, अब सभी घर वालों और इस घर का ध्यान रखने का कार्य तुझे निभाना हैं चल अब अपने शुभ कदमों से हमारे इस घर में प्रवेश कर
जानवी, सास वैशाली की बातों को सुनने के बाद, अपने घर में गृह प्रवेश करती हैं तथा कुछ महत्वपूर्ण रस्मों को निभाने के बाद वह अपने कमरे मे चली जाती हैं जानवी जगह-जगह घर पर रखी हुई नई मशीनों को देखकर, चिंतित हो जाती हैं क्योंकि उसने ऐसी मशीनों का पहले कभी उपयोग नहीं किया होता हैं
अगली सुबह अपने ससुराल मे जानवी उठकर रसोई में जाती हैं लेकिन वहाँ पर रखी हुई तरह-तरह की मशीनों को देखकर उसको कुछ समझ नहीं आता हैं जानवी का सुसराल में पहला दिन हैं और वह अपने परिवारों के लिए अच्छा नाश्ता बनाना चाहती हैं
यहाँ मशीनों को देखकर जानवी कहती हैं कि हे राम! मुझे तो यह सब चलना नहीं आता हैं अब मैं नाश्ता कैसे तैयार करूंगी? कुछ समय बीत चुका हैं अब जानवी की सास वैशाली उठकर पायल छनकाती हुई किचन में आती हैं,
किचन में परेशान जानवी को देखकर वह जानवी से पूछती हैं कि क्या हुआ बहूँ! जानवी? तू इतना परेशान क्यों दिखाई दे रही हैं? अभी घर आए तुझको एक दिन भी नहीं हुआ हैं और तेरे चेहरे की मुस्कान गायब हैं कोई बाहर वाला व्यक्ति देखेगा तो सोचेगा कि ससुराल वाले परेशान करते होंगे?
जल्दी से मुझे बता बात क्या हैं? जानवी हिचकिचाती हुई कहती हैं कि वो मम्मीजी! यहाँ इतनी सारी मशीनों को देखकर मैं परेशान हूँ आप बताइए ना, मैं क्या करू यहाँ लगभग हर कार्य के लिए एक मशीन हैं मुझे इनका उपयोग करना नहीं आता हैं मैं खाना कैसे बनाऊँगी बताइए आप?
वैशाली ने कहा कि जानवी बेटा! देख तू परेशान न हो, मुझे सुबह-सुबह एक कप अच्छी चाय पीनी होती हैं तू मेरे लिए चाय बना और घर पर नाश्ता सभी लोग नौ बजे करते हैं फिलाल उसमें दो घंटे हैं चाय बनाने के बाद तू अपने हिसाब से रसोई को सजा लेना अब यह रसोई तुझे देखनी हैं
इसीलिए तू अपने अनुसार रसोई को सही कर लेना.. गाँव में तेरे हाथों वाली चाय पीकर मुझे बहुत अच्छा लगा था तू एक काम कर मुझे चाय बना दें
जानवी ने बनाई वैशाली के लिए चाय
यहाँ जानवी, वैशाली के लिए चाय बनाने लगती हैं वह बहुत खुश हैं क्योंकि उसकी सास वैशाली ने उसको अपने अनुसार रसोई को सजाने के लिए कहा हैं, बहूँ जानवी के हाथों वाली अच्छी चाय पीकर बाहर चली जाती हैं क्योंकि जानवी गाँव से हैं इसीलिए उसको गाँव के तरीके से खाना बनाने का शौक हैं

गाँव में आज भी खाना बनाने के लिए चूल्हे का उपयोग किया जाता हैं इसीलिए जानवी घर में रसोई के अंदर एक मिट्टी के चूल्हे का निर्माण करती हैं और कहती हैं कि अब मम्मीजी! ने मुझे अपने हिसाब से रसोई सजाने के लिए कह दिया हैं
अब मैं रसोई को गाँव वाली रसोई बना दूँगी मिट्टी के चूल्हे का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद, जानवी सभी बर्तनों को नीचे सजा लेती हैं तथा चूल्हे को जलाकर खाना बनाना शुरू कर देती हैं परिणामस्वरूप जलते हुए चूल्हे से अधिक तेजी के साथ धुआ बाहर निकालना शुरू हो जाता हैं
तेज धुआ देखकर परवीन का पिता अरुण भागते हुए रसोई मे आता हैं और कहता है कि भागों भाई भागों! लगता है यहाँ आग लग गई हैं अरे बाप रे! इतना धुआ तभी अरुण जानवी को रसोई मे नीचे बैठकर खाना, चूल्हे पर पकाते हुए देखता हैं
जिसके बाद अरुण वैशाली को आवाज लगाकर बुलाता हैं अरे वैशाली! यहाँ आओ! वैशाली के साथ साथ उसका बेटा परवीन भी रसोई मे आ जाता हैं फिर वैशाली ओर अरुण दोनों, जानवी को चूल्हे पर खाना बनाते हुए देखते हैं अरुण कहता है कि अरे बहूँ! जानवी तुम चूल्हे पर खाना क्यों बना रही हो?
यहाँ आस-पास के लोग चूल्हे से निकला यह धुआ देखकर, पुलिस बुला लेंगे यहाँ खाना गैस पर बनाया जाता हैं वैशाली ने बहूँ जानवी से पूछा कि बहूँ मैंने तुम्हें रसोई सजाने के लिए बोला था लेकिन तूने यह चूल्हा क्यों बना लिया,
यह रसोई मे सभी बर्तन नीचे क्या कर रहें हैं? और चूल्हे में जलाने के लिए लकड़ियाँ कहाँ से लेकर आई हो तुम? जानवी अपनी सास को उत्तर देते हुए कहती हैं वो मम्मीजी! हमारे गाँव में सभी बहूँ नीचे बैठकर या खड़े होकर खाना बनाती हैं यहाँ रसोई में एक कुर्सी रखती थी मुझे लगा कि यह फालतू हैं
इसीलिए मैंने उस कुर्सी की लकड़ी को चूल्हे मे जलाने के लिए उपयोग में लिया मम्मी जी! गाँव में तो सभी लोग चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं इसीलिए मैंने यहाँ रसोई मे मिट्टी का चूल्हा बनाया हैं यहाँ वैशाली और अन्य घर वालें जानवी के भोलेपन को समझ नहीं पाते हैं
वैशाली अपनी बहूँ जानवी के द्वारा बनाए गए मिट्टी के चूल्हे को बंद करवाती हैं उसका बेटा परवीन कहता है कि माँ, मैं जानवी को समझा दूंगा आप परेशान मत हो परवीन, पत्नी जानवी से बोलता है कि जानवी, यह शहर हैं यहाँ गाँव का चूल्हा नहीं जलेगा
अब तुम्हारे इस चूल्हे का धुआ पूरी सोसाइटी के लोगों को परेशान करेगा और कोई वायु प्रदूषण की शिकायत भी कर सकता हैं इसीलिए भी तुम इस चूल्हे को यहाँ से हटा दो जानवी ने कहा कि ठीक हैं जी, मैं यह सब साफ कर देती हूँ और मैं अब खाना बनाने के लिए गैस का उपयोग करना सीख लूँगी,
मुझे यहाँ सब कुछ समझने मे थोड़ा समय लगेगा लेकिन मैं यहाँ के तौर-तरीके सीख जाऊँगी वैशाली ने बोला कि बहूँ जानवी! तुझे परेशान होने की कोई जरूरत नहीं हैं, लेकिन हाँ तुझे यहाँ गैस पर खाना बनाना सीखा होगा अब तू ज्यादा परेशान मत हो, मैं हूँ ना, मैं तुझे सब कुछ सीखा दूँगी
अच्छा चल अब तू यह सब जल्दी साफ कर हम दोनों मिलकर नाश्ता बनाते हैं वैशाली ने बहूँ जानवी के साथ मिलकर खाना बनाया, वैशाली अपनी बहूँ को बहूँ कम बेटी ज्यादा समझती है कुछ समय बाद, जानवी अपनी सास वैशाली के नेतृत्व में खाना बनाना सीख जाती हैं
लेकिन वह गाँव से है उसको गाँव के तरीके से खाना बनाना बहुत अच्छा लगता हैं इसीलिए जानवी अपनी गाँव वाली रसोई को बहुत अधिक मिस करती हैँ जानवी को देखकर उसका पति परवीन, उसकी परेशानी को अच्छे से समझ रहा था
परवीन-जानवी गए शॉपिंग
एक दिन वैशाली और अरुण घर से बाहर किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाते है इसीलिए जानवी और परवीन घर पर अकेले होते है परवीन, पत्नी जानवी को कुछ शॉपिंग कराने के उद्देश्य से बाहर लेकर जाता हैं

जहाँ पर परवीन जानवी के लिए सिलबट्टे को खरीदता हैं और कहता हैं कि जानवी! मुझे पता है कि तुम गाँव वाली रसोई को मिस करती हो, मैं तुम्हारे लिए सिलबट्टे को खरीद रहा हूँ जिससे तुम गाँव की तरह चटनी बना सकती हो क्या तुम्हें पता है जानवी! पापजी को सिलबट्टे वाली चटनी बहुत पसंद हैं
देखना वह बहुत खुश हो जाएंगे जानवी ने कहा कि हाँ, परवीन जी! मैं बहुत खुश हूँ मुझे समझ आ गया है कि अब मैं गाँव के तरीकों का उपयोग वहाँ करूंगा जहाँ किसी दूसरे को कोई नुकसान न हो परवीन ने कहा कि हाँ, मैंने तुम्हारे लिए लोहे के तवे की जगह मिट्टी का तवा लिया हैं,
मुझे पता है जानवी तुम्हें मिट्टी के तवे पर खाना बनाना अच्छा लगता हैं यह कहना गलत नहीं होगा कि परवीन और जानवी दोनों अब रसोई में थोड़ा थोड़ा परिवर्तन करने लगे थे परवीन, जानवी की खुशी के लिए, रसोई को थोड़ा-थोड़ा उसके हिसाब से बनाने का प्रयास कर रहा था
जिससे कि जानवी को रसोई में एक अपनापन महसूस हो सकें और उसको किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो
वैशाली-अरुण घर वापस आए
जानवी की सास-ससुर घर वापस आकर रसोई में हुए बदलावों को देखकर अपनी बहूँ जानवी की तारीफ करने लगते हैं वैशाली कहती हैं कि अरे बहूँ! क्या बात हैं तूने तो रसोई में नए बदलाव किये हैं

बहूँ जानवी, वैशाली से पूछने लगती हैं कि मम्मी जी! अब आपको कोई परेशानी तो नहीं हैं ना, मैंने रसोई में कुछ परिवर्तन किये हैं अगर आपको कोई गलती दिखाई देती हैं तो आप मुझे बता सकती हैं मैं उसको ठीक कर दूँगी आप मेरे माँ हैं
वैशाली ने कहा कि नहीं! नहीं! जानवी बेटा, मुझे कोई दिक्कत नहीं हैं मैं तो तुझे खुश देखकर बहुत प्रसन्न हूँ मुझे यह सब देखकर अच्छा लगा कि तूने रसोई में शहर और गाँव दोनों मिलकर परिवर्तन किया हैं और तेरा यह सिलबट्टे वाला आइडिया बहूँ! बहुत बढ़िया हैं
मुझे और तेरे पापजी को सिलबट्टे वाली चटनी खाने का बहुत शौक हैं हाँ, लेकिन शहर में इसका उपयोग कोई नहीं करता हैं क्योंकि इसमे समय भी अधिक लगता हैं लेकिन अब मैं तेरे हाथों से बनाई सिलबट्टे वाली चटनी खाऊँगी
जानवी ने उत्तर दिया कि मम्मीजी! आप बस बताइए मुझे आपको क्या-क्या खाना हैं मैं अभी बना देती हूँ आपको पता है आप जब मेरे आस-पास रहती हैं ना, तो मुझे बहुत अच्छा लगता हैं वैशाली ने कहा कि बेटा! मैं हमेशा तेरे पास हूँ और हाँ मैंने छत पर मिट्टी के चूल्हे का प्रबंध करवाया हैं
हम महीने मे एक दो बार छत पर चूल्हे पर बना खाना खाए करेंगे वहाँ चूल्हे से निकला धुआ किसी को भी परेशान नहीं करेगा यहाँ परवीन आता हैं और कहता है कि माँ, मैंने ऊपर मिट्टी के चूल्हे सहित सभी जरूरी बरतों को लगवा दिया हैं
वहाँ एक तरह से हमारा गाँव का किचन बन गया हैं इस तरह जानवी शहर में रहकर अपने गाँव के तरीकों को भी महत्व देती हैं

नमस्ते! मैं नितिन सोनी कई वर्षों से इंटरनेट पर एक लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूँ मुझे मजेदार कहानियाँ, शायरियाँ और रिश्तों संबंधित अन्य लेखों को शेयर करना अच्छा लगता हैं मेरे द्वारा एनएस Quotes मंच पर अनेक उपयोगी आर्टिकल को शेयर किया जाता हैं लेखक के साथ-साथ मैं इस ब्लॉग का फाउन्डर भी हूँ मेरा यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! दुबारा भी आए
