Hindi Mein Kahani: – यह हिंदी कहानी मजेदार हैं एक शर्मा परिवार मेरठ शहर के इन्द्रानगर का निवासी था यह परिवार मेरठ में वर्ष 1984 से निवास कर रहा था परिवार का मुखिया राहुल शर्मा था जिसकी धर्मपत्नी कान्ता शर्मा थी उनका एक बेटा था जिसका नाम रोनक था
महत्वपूर्ण किरदार प्रणाली
| मुख्य किरदार | राहुल शर्मा |
| पत्नी | कान्ता शर्मा |
| बेटा | रोनक शर्मा |
| बहूँ | संजना शर्मा |
| पोता | आयुष शर्मा |
| कान्ता की ननंद | शारदा शर्मा |
| पड़ोसन | शिवानी ठाकुर |
| शिवानी की दोस्त | रोशनी अरोरा |
कहानी का प्रारंभ ( हिंदी कहानी मजेदार )
एक दिन कान्ता ( राहुल की पत्नी ) ने अपनी ननंद को घर पर रखें टेलीफोन से फोन मिलाकर कहा कि जीजी आपके राहुल भैया और हम आपको बहुत मिस कर रहें हैं
यह सुनकर शारदा ( ननंद ) ने कहा कि आपको क्या बताऊँ कान्ता भाभी रोजाना घर के कार्यों में पूरा समय निकाल जाता हैं लेकिन मैं वहाँ आना चाहती हूँ मेरा मन भी भैया से मिलने को उत्सुक हैं

कान्ता ने खुश होकर कहा कि यह बहुत अच्छी खबर हैं आपके आने से हमारा भी मन लग जाएगा, आप स्टेशन पहुँचकर मुझे फोन कर देना रोनक ( बेटा ) आपको लेने आएगा मैं यह बात आपके भैया को बताती हूँ वह बहुत प्रसन्न होंगे
लगभग 4 दिनों के बाद रोनक की बुआजी काशीपुर से मेरठ आ जाती हैं उस दिन कान्ता अपनी बहूँ ( संजना ) से कहती हैं कि बहूँ तूने नाश्ते और खाने की तैयारियाँ अच्छे से की हैं ना? तेरी बुआ सास आ रही हैं उनको खाना खाने का अधिक शौक हैं
संजना ने कहा कि हाँ, मम्मी जी मैं उनके लिए खाने में स्पेशल पनीर सब्जी, बैगन का भरता, साग, मक्खन रोटी, दही भल्ला ओर रायता बनाया हैं बुआ जी के आने पर मैं उनको गरमा-गरम खाना परोस दूँगी
उसी समय संजना के पास, पड़ोसन ( शिवानी ) का फोन आने लगता है जिसके बाद वह फोन पर कहती हैं कि मैं अभी आई?
इतना कहकर वह पड़ोसन शिवानी के घर चली जाती हैं शिवानी और संजना बहुत अच्छी दोस्त हैं शिवानी, संजना से कहती है कि संजना मेरी कुछ फ़्रेंड्स आज लंच पर खाना खाने के लिए आ रही हैं लेकिन लगता हैं मुझे फीवर हो रहा हैं क्या तुम मेरी फ़्रेंड्स के लिए खाना बना सकती हो? प्लीज?
संजना ने कहा कि शिवानी तुम्हें प्लीज कहने की जरूरत नहीं हैं हम बेस्ट फ़्रेंड्स है मैं खाना बना दूँगी
शारदा का आगमन
यहाँ संजना, खाना बनाने के लिए रसोई मे जाती हैं उधर संजना का पति रोनक बुआ को मेरठ सिटी स्टेशन से घर लेकर आता हैं शारदा ( बुआ ) के घर पहुँचने पर कान्ता कहती है कि आइये जीजी आपको देखकर बहुत अच्छा लगा, आप कैसी हो?
शारदा ने उत्तर दिया कि मैं बिल्कुल ठीक हूँ भाभी बस, ट्रेन के सफर में थोड़ी थकान हैं आपको पता है ना कि खाना खाये बिना मेरा मूड खराब रहता हैं कान्ता ने कहा कि जीजी आप फ्रेश हो जाए मैं आपके लिए खाना लगाती हूँ
शारदा ने कहा कि कान्ता भाभी अब तो आपके घर मे बहूँ हैं आप उसको खाना लगाने के लिए बोल दीजिए
कान्ता ने हिचकिचाते हुए कहा कि संजना बहूँ घर पर नहीं हैं वह किसी कार्य से बाहर गई हैं लेकिन पूरा खाना उसने बनाया हैं मुझे सिर्फ परोसना हैं

वहाँ संजना, शिवानी के घर खाना बनाने में समय को देखना भूल जाती हैं परिणामस्वरूप वह सभी के खाना खाने के बाद घर पहुँचती हैं फिर बुआ सास से मिलने पर संजना उनको पैर छूकर प्रणाम करती हैं,
शारदा संजना को आशीर्वाद देती हैं और पूछती हैं कि बहूँ मैं इतने समय बाद घर आई हूँ तू कहाँ थी क्या तुझे पता नहीं था कि मैं यहाँ आ रही हूँ
बहूँ संजना ने उत्तर दिया कुछ नहीं बुआ जी बस, कुछ जरूरी काम से बाहर गई थी
उसके बाद संजना रसोई में बर्तन धोने चली जाती हैं बर्तन धोने के बाद, वह अपने कमरे में बैठी हुई विचार करने लगती हैं कि शिवानी ने कहा था उसको फीवर हैं वह ठीक नहीं हैं, मैं एक बार उसको देखकर आती हूँ
संजना, शिवानी के घर पहुँच जाती हैं जहाँ शिवानी कहती है कि संजना मेरी फ्रीडस को तुम्हारे हाथ की पूरीयाँ बहुत अच्छा लगी हैं, उसको थोड़ा और खाने का मन हैं क्या तुम उसके लिए बना सकती हो?
संजना का उत्तर – हाँ बना देती हूँ
संजना दुबारा पड़ोसन शिवानी के कहने पर खाना बनाने मे व्यस्त हो जाती हैं उधर दिन का खाना बनाने के लिए कान्ता, संजना को ढूढ़ रही हैं बहूँ के ना मिलने पर कान्ता घर पर खाने के लिए खुद दाल-चावल और रोटी बनाती हैं
लगभग कुछ दिनों तक यह सब चल रहा हैं लेकिन एक दिन शारदा, संजना को देखकर, कान्ता से कहती हैं कि भाभी मैं जब से आई हूँ यह देख रही हूँ संजना बहूँ किसी भी समय घर से बाहर चली जाती हैं मैंने संजना को पड़ोसन से गप्पे मारतें हुए देखा हैं यह चक्कर क्या हैं

कान्ता ने कहा कि पता नहीं जीजी, पड़ोसन शिवानी और संजना बहूँ दोस्त बने हुए हैं, शिवानी का पति अमेरिका में नौकरी करता हैं अच्छा कमाता हैं एक बार बाजार से लौटते समय मैं और बहूँ बहुत थकें हुए थे और हमारी घर पहुँचकर एक कप चाय पीने की इच्छा हो रही थी
उसी दौरान बहूँ ने कहा था कि मम्मी जी मैं कहती हूँ ना कि हमें एक स्कूटी लेनी चाहिए, उससे हम आराम से बाजार और घर के अन्य महत्वपूर्ण कार्य निपटा सकतें है हम घर के निकट पहुँचते हैं तभी हमने देखा कि पड़ोसन शिवानी महँगी वाली गाड़ी से उतर रही थी

संजना ने मुझसे कहा कि मम्मीजी आप चलिए मैं अभी आई फिर संजना, शिवानी से बात करते हुए उसके घर चली गई जहाँ संजना ने शिवानी के घर लग्जरी समानों को देखा, एक साथ मिलकर कॉफी बनाई और साथ मे कॉफी को बैठकर पीया
कुछ समय बाद संजना वापस घर पर आई, फिर वह डिनर बनाने के लिए रसोई मे चली गई उसी दिन से शारदा भाभी, संजना बदलने लगी हैं हाँ उसके बाद से संजना और शिवानी दोस्त बन गई
मैं कहना तो नहीं चाहती हूँ लेकिन लगता है कि संजना बहूँ, पड़ोसन शिवानी की अमीरी के कारण उसकी तरफ आकर्षित हैं
गाजर का हलवा
फिर एक दिन संजना ने घर पर गाजर का हलवा बनाया और वह हलवा पड़ोसन शिवानी के लिए लेकर गई वहाँ पहुँचने पर, शिवानी ने संजना से कहा कि आओ संजना, क्या तुम सूप पीना पसंद करोगी?

संजना ने उत्तर दिया कि हाँ शिवानी जी, मैं आपके लिए देशी घी का बना गाजर का हलवा भी लेकर आई हूँ
पड़ोसन शिवानी ने संजना को धन्यवाद बोलकर कहा कि तुम सूप बनाओ मैं अपने हाथों का सूप रोजाना पीकर बोर होने लगी हूँ जिसके बाद संजना ने शिवानी के लिए सूप बनाया
कुछ दिनों तक यह लगातार चलता रहता हैं तब कान्ता ने संजना को कहा कि बहूँ तुम हर समय पड़ोसन के साथ रहती हो ऐसा लगता है कि तुम्हें इस घर के लिए कोई चिंता नहीं हैं
बहूँ संजना का उत्तर – मम्मीजी, पूरी गली मे मेरी केवल एक दोस्त हैं और मैं केवल कुछ समय के लिए उसकी मदद कर देती हूँ, कल उसको बुखार था जिसके कारण मैंने उसकी थोड़ी करके खाना बनाया, मैं उसके साथ थोड़ा बहुत हँस-बोलती हूँ तो उसमे क्या बुरा हैं
उस दिन से बहूँ संजना का मन, शिवानी के घर पड़ोस मे अधिक लगने लगा यह सबकुछ देखकर तथा टोकने पर अपनी बहूँ संजना का उत्तर सुनकर सास कान्ता ने उसको रोकना-टोकना पूरी तरह से बंद कर दिया उसने सोचा कि खुद ही एक दिन संजना बहूँ की अकल ठिकाने आ जाएगी
संजना बहूँ पुन: शिवानी के घर जाती हैं और शिवानी के घर का कार्य करती हैं यह देखकर रोनक की बुआजी ने भी संजना बहूँ को समझाने का एक बार प्रयास किया परंतु अपने घर पर न रुककर संजना का बार-बार पड़ोसन शिवानी के घर चले जाना जारी रहा

फिर एक दिन जब शिवानी के घर संजना पहुँची तब शिवानी ने संजना से कहा कि संजना मेरे कुछ पुराने दोस्त परसों घर पर पार्टी के लिए खाना खाने आएंगे तो क्या तुम मेरी मदद के लिए परसों आ सकती हो? तुम्हारे आने से मेरी रसोई मे थोड़ी बहुत मदद हो जाएगी
संजना का उत्तर – शिवानी जी आप बिल्कुल भी परेशान मत हो, सब कुछ अच्छे से हो जाएगा मैं हूँ ना आपके साथ मैं परसों सुबह सुबह जल्दी आ जाऊँगी
परसों का दिन
परसों का दिन निकलता हैं संजना सुबह 5 बजें उठकर, जल्द ही पड़ोसन शिवानी के घर मदद करने के लिए पहुँच जाती हैं वह शिवानी के घर, रसोई का पूरा कार्य संभाल लेती हैं तथा शिवानी के सभी दोस्तों का अच्छे से ध्यान रखते हुए उनको खुद के द्वारा बनाया गया स्वादिष्ट खाना परोसना शुरू करती हैं

संजना, शिवानी के दोस्तों को किसी भी प्रकार कि समस्या नहीं होने देती है, यह सबकुछ देखकर शिवानी की एक पुरानी दोस्त ( नाम – रोशनी ) उससे पूछती हैं कि यह कौन हैं जो सभी लोगों का इतना ख्याल रख रही हैं
शिवानी का उत्तर – मेरी अससिस्टेंट हैं अब तुम्हें तो पता हैं हम अमीर लोगों के लिए अससिस्टेंट रखना कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं हैं
शिवानी को यह बात पता नहीं होती हैं कि उसका यह जवाब संजना सुन लेती हैं परिणामस्वरूप उसको बहुत बुरा लगता हैं उस समय संजना के घर से पार्टी मे उसकी बुआसास ( शारदा ) और सास ( कान्ता ) वहाँ आ जाती हैं वह यह सब सुनती हैं

संजना, शिवानी से कहती हैं कि शिवानी जी मैंने एक अच्छे दोस्त की तरह हमेशा आपकी हर संभव मदद की लेकिन मुझे नहीं पता था कि आप मुझे अपना एक अससिस्टेंट समझती हैं शायद! मैं गलत थी
शारदा ने बीच मे बोलते हुए संजना से कहा कि जिस पड़ोसन शिवानी को तू अपना अच्छा दोस्त बताती हैं बहूँ वह तो तुझे केवल एक अससिस्टेंट का दर्जा देती हैं और तुझे एक अससिस्टेंट समझकर यह अपने घर का सारा कार्य कराती हैं
शारदा द्वारा की गई बातों से शर्मिंदा होकर संजना अपनी नजरे झुका लेती हैं फिर वह रोती हुई अपने घर लौट आती हैं
संजना को अब सब कुछ समझ आने लगा था वह घर पर सबसे पहले अपनी सास एंव बुआसास से माफी मांगते हुए कहती हैं कि बुआजी, मम्मी जी मैं जानती हूँ कि आपकी बात न मानकर मुझसे गलती हुई हैं मैं दोस्ती के दिखावे में थी
कान्ता ने कहा – नहीं संजना बहूँ तेरे जैसा दोस्त तो बहुत किस्मत से मिलता हैं हाँ, पड़ोसन शिवानी को तेरी दोस्ती की कोई कदर नहीं हैं उसको अमीरी के आगे कुछ और नहीं दिखाई देता हैं
शारदा – कोई बात नहीं बहूँ संजना, कहते है जो होता हैं अच्छा होता हैं, सब ठीक हैं तुझे ज्यादा परेशान होने की कोई जरूरत नहीं हैं
अब रोनक की पत्नी संजना अपने घर-परिवार को प्यार से सजाती हैं उसको यह समझ आ गया हैं कि दुनिया में हर चमकती वस्तु को, हम सोना नहीं कह सकते हैं इसीलिए अब वह अपने परिवार के साथ बहुत खुश हैं
सीख – ज़िंदिगी मे अपने, हमारा असली धन हैं क्योंकि समाज मे चमक केवल बाहर दिखाई देती हैं रोशनी हमारे दिल से होती हैं इसीलिए बहारी चमक केवल दिखावा हैं

नमस्ते! मैं नितिन सोनी कई वर्षों से इंटरनेट पर एक लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूँ मुझे मजेदार कहानियाँ, शायरियाँ और रिश्तों संबंधित अन्य लेखों को शेयर करना अच्छा लगता हैं मेरे द्वारा एनएस Quotes मंच पर अनेक उपयोगी आर्टिकल को शेयर किया जाता हैं लेखक के साथ-साथ मैं इस ब्लॉग का फाउन्डर भी हूँ मेरा यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! दुबारा भी आए
