Majedar Kahaniya: – भारत के नोएडा से मिली यह मजेदार कहानी हैं जहाँ मुख्य किरदार नोएडा का एक इंजीनियर अर्जुन कश्यप हैं यह मजेदार स्टोरी इन हिंदी हमारे ब्लॉग पर सबसे पोपुलर हिंदी कहानी हैं यहाँ मॉर्डन घराने में गाँव वाली बहूँ! बेटा लेकर आता हैं
महत्वपूर्ण कार्य प्रणाली
| मुख्य किरदार | अर्जुन कश्यप |
| माँ | मीना कश्यप |
| पिता | मयंक कश्यप |
| पहली बहन का नाम | नेहा कश्यप |
| दूसरी बहन का नाम | प्रेमा कश्यप |
| स्थान | नोएडा ( सेक्टर 50 ) |
| निमंत्रित शादी में दुल्हन | सुनीता |
| अर्जुन का मित्र | वरुण कुमार |
| गाँव का नाम | नवाबगंज |
| सुनीता की सहेली का नाम | तानिया |
| सुनीता का भाई | विवेक |
हिंदी कहानी का आरंभ – मजेदार स्टोरी इन हिंदी (Majedar Kahaniya)
एक इंजीनियर लड़का भारत के नोएडा ( सेक्टर 50 ) में रहता था, जिसका नाम अर्जुन कश्यप हैं अर्जुन एक मेहनती और काबिल व्यक्ति हैं वह नोएडा में अच्छा कमाता हैं उसके पिता एक अच्छे व्यापारी हैं जिनका कपड़ें का व्यापार हैं
एक दिन मयंक के गाँव नवाबगंज से यश की पुत्री सुनीता के विवाह का निमंत्रण, अर्जुन के घर पहुँचता हैं बाहर घंटी बजती हैं मीना दरवाजा खोने के लिए जाती हैं जहाँ उसको पता चलता हैं कि गाँव से शादी का निमंत्रण आया हैं वह अपने पति मयंक को यह बात बताती हैं

मयंक उत्तर में कहता हैं कि क्या गाँव नवाबगंज से शादी का निमंत्रण, अब तुम जानती हो ना, मीना मुझसे सफर नहीं किया जाता हैं, इसीलिए मैं तो नहीं जा पाऊँगा, मीना कहती हैं कि हाँ जी! मेरे भी शरीर में दर्द रहता हैं फिर क्या करें? अर्जुन को भेज देते हैं
मयंक ने कहा कि हाँ मीना! यह ठीक रहेगा, तुम एक काम करना शाम को जब अर्जुन घर आएगा तब तुम उसको शादी में जाने के लिए बोल देना कुछ देर बात शाम होने लगती हैं तथा अर्जुन अपने काम से घर लौटकर आता हैं वह थका हुआ हैं
मीना अपने पुत्र अर्जुन से बोलने लगती हैं कि बेटा अर्जुन! तेरे पिताजी के गाँव नवाबगंज से शादी के लिए निमंत्रण आया हैं अब मैं और तेरे पापा नहीं जा पाएंगे तू ऐसा करना बेटा! कुछ दिनों की बात हैं चला जाना वहाँ!
मयंक का बेटा एक मेहनती व्यक्ति हैं ऐसे में वह गाँव में शादी के लिए जाने को अपने घूमने फिरने के रूप में देखने लगता हैं और माँ से बोलता हैं कि हाँ, माँ मै चला जाऊँगा, बहुत समय हो गया हैं मैं कही घूमने के लिए भी नहीं गया हूँ मुझे भी कुछ दिन का आराम मिल जाएगा
लेकिन माँ क्या मैं अपने मित्र वरुण को भी साथ लेकर जाऊँगा, मैं एक काम करता हूँ एक बार वरुण से पूछकर अपनी टिकट को बुक कर लेता हूँ वह वरुण को फोन मिलकर अपने साथ गाँव चलने के लिए मना लेता हैं जिसके बाद वह गाँव के लिए दो ट्रेन टिकट बुक कर लेता हैं
वरुण-अर्जुन ट्रेन से नवाबगंज गए
कुछ दिनों बाद वह अपने मित्र वरुण के साथ शादी में गाँव के लिए निकल जाता हैं, अर्जुन का स्वभाव शांत रहता हैं ऊपर से वह शहर नोएडा में अच्छा इंजीनियर होता हैं ऐसे में गाँव पहुँचकर उसका अच्छा स्वागत होता हैं क्योंकि गाँव में उसके दादा जी का नाम भी बहुत सम्मान के साथ लिया जाता हैं

वास्तव में उसके पिता के पिता, सालों पहले उस गाँव में अच्छे और नामी जमींनदार हुआ करते थे अर्जुन जल्दी-जल्दी सभी लोगों से मिलकर शादी से बाहर हो जाता हैं क्योंकि उसको अधिक घुलना-मिलना और बात करना पसंद नहीं होता हैं
शादी से बाहर निकलते समय, वह एक लड़की को देखता हैं जिसने हरे रंग वाली साड़ी पहन रखी हैं, उसको यह पता नहीं हैं कि वह लड़की कौन हैं? लेकिन वह लड़की शादी में आए मेहमानों को पानी सर्व करने का कार्य कर रही हैं, गाँव वाली उस लड़की में सिम्पल सादगी का एहसास, अर्जुन को हो रहा था
शायद! अर्जुन उस लड़की को देखकर आकर्षण का अनुभव कर रहा था अर्जुन, उस लड़की के विषय में पता लगाने के लिए, सुनीता के भाई विवेक को बुलाता हैं फिर वह विवेक से कहता हैं कि अरे भाई विवेक! मुझे पानी पीना हैं! अरे वो लड़की उसका क्या नाम हैं!, वो वहाँ पानी सर्व कर रही हैं
विवेक बोलता हैं कि अर्जुन भाई! वह सुनीता दीदी की सहेली हैं उसका नाम तानिया हैं, अर्जुन कुछ और पता लगाने के लिए विवेक से बोलता हैं कि लेकिन विवेक दोस्त होकर ऐसे पानी कौन सर्व करता हैं, उसको तो सुनीता के साथ होना चाहिए ना,
विवेक ने कहा कि हाँ, भैया! लेकिन तानिया दीदी को यह सब अच्छा लगता हैं, वह पड़ोस वालें गाँव से हैं ना, सुनीता दीदी और तानिया दीदी दोनों एक साथ कॉलेज में थी अच्छा भैया! मैं आपके लिए पानी मँगवाता हूँ
अर्जुन-तानिया की पहली मुलाकात
ऐसा कहकर विवेक तानिया को आवाज लगाते हुए कहता हैं कि तानिया दीदी! यहाँ अर्जुन भैया को एक गिलास पानी दे दीजिए विवेक की आवाज सुनकर तानिया अर्जुन को पानी देने के लिए आती हैं और विवेक को पानी का गिलास देती हैं
अर्जुन एकदम चुप था, तानिया से उसकी नजर मानो हट नहीं रही हो, तानिया पानी देकर अर्जुन को चली जाती हैं जिसके बाद अर्जुन, मित्र वरुण से कहता है कि वरुण एक बात बता कि क्या एक नजर में प्यार हो जाता हैं
वरुण उसको बोलता हैं कि अरे अर्जुन मेरे भाई, यह सब फिल्मों में ज्यादा होता हैं हम इंजीनियर हैं अर्जुन, हम ऐसी चीजों पर अधिक विश्वास नहीं कर सकतें हैं अर्जुन एक समझदार व्यक्ति था लेकिन वह तानिया को देखकर खुद को यह समझा नहीं पा रहा था कि उसको यह क्या हो रहा है?

मौसम अधिक खराब होने लगा था, वहाँ बारिश होना शुरू हो गई हैं और अर्जुन को उसका दोस्त वरुण छाता लाकर देता हैं जिसको वह लेकर तानिया की तरफ बढ़ने लगता हैं और तानिया को छाते में आने के लिए बोलता हैं तानिया हिचकिचाती हैं लेकिन बारिश के कारण उसके छाते के नीचे आ जाती हैं
गाँव में बारिश से बचने के लिए लोग पिन्नी वाला टेंट लगा लेते हैं जिसके बाद अर्जुन अपने मित्र वरुण से मिलता हैं यहाँ वरुण पूरा भीग चुका हैं तभी अर्जुन, वरुण से हँसते हुए कहता है कि अरे भाई! वरुण तू तो पूरा भीग गया हैं
वरुण कहता है कि अरे भाई! तू यहाँ मजनू बनाता जा रहा हैं, अरे तुझसे समझ आ रहा हैं ना, तू क्या सोच रहा हैं, तानिया एक गाँव की लड़की हैं लेकिन मेरे भाई तू नोएडा में कितना बड़ा इंजीनियर हैं तुझे शहर में कोई भी मिल जाएगी और तेरे परिवार का क्या? उनको आजकल वाली मॉर्डन बहूँ चाहिए भाई!
अर्जुन कहता है कि वरुण! तू मेरा मित्र हैं तुझे मुझे समझना चाहिए मैं तानिया को पसंद करने लगा हूँ यार! आई लव हर! मैं हेंडसम हूँ! अच्छा कमाता हूँ तानिया मुझसे शादी करेगी ना, मुझे नहीं पता तू इसमें मेरी मदद करेगा मैं शादी इस लड़की से ही करूंगा
वरुण ने कहा कि अच्छा ठीक है भाई! लेकिन अब हमें गाँव में कुछ दिनों तक रुकना पड़ेगा तू एक काम कर कुछ दिनों के लिए हमारी Leave Application ऑफिस मेल कर दे और घर पर भी इन्फॉर्म कर देना अपने?
अर्जुन के रिश्ते के लिए पंडित जी का आगमन
कुछ दिनों तक वह गाँव मे ठहर जाता हैं परिणामस्वरूप अर्जुन और तानिया के बीच बात-चीत होने लग जाती हैं लेकिन अर्जुन को पता नहीं है कि नोएडा में उसके घर वाले उसके लिए एक अच्छी मॉर्डन बहूँ ढूंढ रहें हैं वह दिल्ली से लड़कियों का रिश्ता अपने बेटे अर्जुन के लिए मँगवा लेती हैं
पंडित अर्जुन के घर मीना से मिलकर लड़कियों के रिश्ते दिखाने के लिए आता हैं जहाँ मीना पंडित से बोलती हैं कि पंडितजी! अब आपको एकदम नए मॉर्डन परिवार वाली लड़कियों का फोटो मुझे दिखाना हैं लेकिन हमारे स्टैंडर्ड वाली लड़की होनी चाहिए बस..

मयंक, मीना से कहता है कि अरे भाग्यवान! अपने पुत्र के लिए लड़की ढूंढ रही हो? तो इतना मॉर्डन मत देखना कि घर-परिवार को बनाकर ना चल पाए यहाँ मीना कहती हैं कि जी मैं समझ गई हूँ पंडित जी आप फोटो दिखाइए
उधर अर्जुन गाँव से घर आकर अपने पिता मयंक से, तानिया से शादी करने को लेकर चर्चा करता हैं परिवार वालें सभी अर्जुन से बहुत प्यार करते हैं और उसके पिता मयंक, अर्जुन की पसंद से बहुत खुश हैं जिसके बाद पिता मयंक, अपने गाँव अर्जुन का रिश्ता, तानिया के लिए लेकर जाता हैं
तानिया के परिवार वालें भी अर्जुन को देखकर रिश्ते के लिए हाँ बोल देते हैं जिसके बाद जल्द से जल्द, अर्जुन का रिश्ता तानिया के साथ पूर्ण विधि-विधान के साथ सम्पन्न हो जाता है अर्जुन, तानिया को नोएडा अपने घर लेकर आ जाता हैं तानिया को गाँव की तरह साड़ी पहनना अच्छा लगता है
वह अपने पति अर्जुन के साथ मनाली घूमने के लिए जाती हैं जहाँ उसके साथ अर्जुन की बहने प्रेमा और नेहा जाती हैं लेकिन तनिया को साड़ी पहने देख नेहा कहती हैं कि तानिया भाभी! आप भैया के साथ यहाँ घूमने के लिए आई हैं और आप साड़ी पहन रही हैं, ऐसा आजकल कौन करता हैं
तानिया, नेहा से कहती हैं कि नेहा दीदी, साड़ी पहनना तो हमारा कल्चर हैं मुझे लगता हैं कि आपके अर्जुन भैया को मेरा साड़ी पहनना अच्छा लगता हैं और मुझे शुरू से साड़ी पहनने का शौक हैं तुम्हें भी यह ट्राइ करना चाहिए
यहाँ नेहा उत्तर देते हुए कहती है कि नहीं नहीं! भाभी, मैं साड़ी नहीं पहन सकती हूँ और मैं शहर से मॉर्डन लड़की हूँ आपके जैसे गाँव से नहीं हूँ
नेहा द्वारा यह कहा जाना, तानिया की सास मीना सुन लेती हैं जिसके बाद वह नेहा को डाटते हुए कहती हैं कि तुम अपनी भाभी से यह किस तरह बात कर रही हो? वह तुमसे बड़ी हैं ना? तुरंत माफी मागों? अभी
माँ मीना के कहने पर नेहा, तानिया से सॉरी बोलते हुए कहती है कि मुझे माफ कर दीजिए भाभी वो मैं ये सब नहीं बोलना चाहती थी पता नहीं कैसे?
तनिया, नेहा की बातों को दिल पर नहीं लेती हैँ और उसको माफ करते हुए कहती हैं कोई बात नहीं! दीदी मुझे बुरा नहीं लगा, मैं समझती हूँ आप शहर से हैं मॉर्डन सोसाइटी में रहती हैं यहाँ के हिसाब से आपको फैशन का अच्छा ज्ञान हैं चलिए छोड़िए यह बात..
अर्जुन और तानिया का हनीमून
कुछ दिनों बाद अर्जुन ऑफिस से हनीमून के लिए छुट्टी लेता हैं जिसके बाद तानिया और अर्जुन हनीमून के लिए विदेश ( लंदन ) घूमने निकाल जातें हैं जहाँ वह बहुत आनंद उठाते हैं अर्जुन, तानिया को विदेशी कल्चर दिखाता हैं जिसको देखकर तानिया भी मॉर्डन कल्चर को समझने प्रयास करती हैं
हनीमून पर अर्जुन और तानिया मजे करके वापस नोएडा आ जाए है यहाँ घर पर तानिया की पहली रसोई नहीं हुई थी इसीलिए मीना, तानिया से पहली रसोई बनाने के लिए कहती है तानिया! खाना बनाने के लिए जब रसोई मे जाती हैं तानिया गाँव से हैं

इसीलिए वह अच्छा-अच्छा खाना पहली बार परिवार वालों के लिए बनाती हैं लेकिन उसने पूरी रसोई छानमारी हैं लेकिन उसको खाना परोसने के लिए केवल स्टील बर्तन दिखाई दे रहे हैं परंतु उसको पत्तल की खोज थी
कुछ समय बाद मीना, तानिया को आवाज लगाकर कहती है कि तनिया बहूँ, खाना बनाने में तुझे इतना समय क्यों लग रहा हैं, जिस तरह गाँव में लोग केवल मेहमानों के लिए स्टील के बर्तनों का उपयोग करते हैं उसी तरह तानिया कटोरियों में रोटियाँ एंव,
स्टील प्लेटों में सब्जियाँ रखकर परिवार के लिए खाना परोस देती हैं जिसको देखकर, परिवार के सभी लोग एक दूसरे को देखने लगते हैं मीना, तानिया से कहती हैं कि तानिया बहूँ! यह सब क्या हैं? यह इंसानों का खाना है या जानवरों का खाना,
तनिया कहती है कि नहीं नहीं! मम्मी जी हमारे गाँव में तो लोग ऐसे ही खाना खाते हैं हाँ, रसोई में मुझे पत्तल नहीं दिखाई दिए अन्यथा मैं पत्तल में सबको खाना सर्व कर देती, मीना गुस्सा होते हुए अर्जुन से बोलती हैं कि देख अर्जुन अपनी गाँव की बीवी को, इसको खाना सर्व करना भी नहीं आता हैं
अच्छा हुआ मैंने आस-पास के लोगों को खाने पर नहीं बुलाया अन्यथा सब लोग हँसते हम पर! अर्जुन ने माँ से कहा कि माँ, उसको अभी यह सब पता नहीं हैं आप परेशान क्यों होती हैं अगर उसको कुछ नहीं पता है तो हम उसको समझा देंगे
मीना कहती हैं कि पड़ोसन सरला तो अपनी मॉर्डन बहूँ के गुणगान गागाकर नहीं रुकती हैं अगर उसको यह सब पता चलता तो पूरी सोसाइटी में हमारा मजाक उड़ता! तानिया बहूँ! तुझे इतना नहीं पता है कि सब्जी कटोरियों में परोसते हैं प्लेट मे नहीं,
यह सब होने के बाद तानिया को बुरा लगता हैं और वह अपने कमरे मे चुप-चाप चली जाती हैं कुछ समय बाद अर्जुन, तानिया को समझाते हुए कहता है कि तानिया, तुम माँ की बातों का बुरा मत मानो, वो उन्होंने खाने को ऐसे परोसा देखा तो उन्होंने यह सब कहा.. तुम तो माँ को जानती हो वो दिल से बुरी नहीं हैं
तानिया अपने पति से कहती है कि जी मुझे माँ की बात का बुरा नहीं लगा हैं मैं ठीक हूँ! आप मुझे बताइए आपको क्या खाना हैं मैं अभी बना देती हूँ
तानिया का पति बोलता हैं कि नहीं तानिया! अब तुम पहली बार कुछ बनाती हो और मैं उसको न खाऊँ ऐसा कैसे हो सकता है मैंने तुम्हारा खाना चखा हैं वह बहुत अच्छा हैं इसीलिए तो मैंने कहा खाना ठीक था लेकिन गलत तरीके से सर्व किया गया था तुम आगे से ध्यान रखना कि प्लेट में रोटियाँ और कटोरी में सब्जी सर्व करनी हैं
हाँ, मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही हैं मैं चला जाता हूँ तुम अपना ख्याल रखना, तानिया की दोनों ननंद कॉलेज जाती हैं, मयंक अपने काम पर जाता हैं और मीना भी किसी को देखने के लिए हॉस्पिटल जाती है घर में सब कुछ इधर-उधर फैला हैं तानिया, नेहा, प्रेमा ओर मीना तीनों के कमरे को साफ करती हैं
घर को साफ-सुथरा देखकर मीना एकदम खुश होने लगती हैं जिसके बाद मीना, तानिया बहूँ! की तारीफ करती हैं और सुबह उसको इतना कुछ सुनने के लिए सॉरी बोलती हैं तानिया कहती है कि नहीं मम्मीजी! आपको सॉरी बोलने की कोई जरूरत नहीं हैं मेरे गलती थी तभी अपने वो सब कहा, भूल जाए उसे
पार्टी मे गया कश्यप परिवार
एक दिन पूरा कश्यप परिवार, सोसाइटी में किसी के यहाँ पार्टी में जाते हैं जहाँ पड़ोसन सरला, अपनी मॉर्डन बहूँ के साथ आई हैं उसकी मॉर्डन बहूँ ने छोटे-छोटे स्टाइलिश कपड़े पहने हैं लेकिन अर्जुन की पति तनिया एक सुन्दर साड़ी में वहाँ जाती हैं वहाँ वो सरला के पैर छूकर उसका आशीर्वाद लेती है
तानिया को साड़ी में देखकर सरला कहती हैं कि अरे बहूँ! अब तो गाँव वाले कपड़ें पहनना छोड़ दें अरी मीना, तूने अपनी बहूँ को शहरी कपड़ें पहनना नहीं सिखाया मीना कहती है कि नहीं सरला बहन, तानिया का साड़ी पहनना, अर्जुन को अच्छा लगता हैं,

तभी सरला की मॉर्डन बहूँ अनुष्का! उससे कहती हैं कि मदर-इलॉ, मुझे डीजे पर डांस करना है आप मेरी सेंडल पकड़े यह सुनकर सरला शर्म से नजरे झुका लेती हैं यहाँ सरला का पति मनोज, अनुष्का से बोलता है कि बहूँ तुझे घर आए दो हफ्ते हो गए हैं और तू दो हफ्ते से रोज पार्टी में जा रही हैं जरा अपने परिवार, घर गृहस्ती के बारे मे भी सोच लिया कर
यह सुनकर मॉर्डन बहूँ अनुष्का कहती हैं कि ए बुड्ढे! तू मेरा दिमाग क्यों खराब कर रहा हैं मैंने तुझे तेरी सलाह मांगी हैं क्या? यह मेरा ज़िंदिगी हैं मैं अपने हिसाब से चलूँगी आगे से मुझे यह सब मत बोलना!
अपनी बहूँ के द्वारा यह सब सुनकर सरला और मनोज बहुत शर्मिंदा हैं उधर मीना की बहूँ तानिया अपने पूरे परिवार का अच्छे से ध्यान रखती हैं यह सब देखकर, मीना के ख्याल बदल जाते हैं वह अपनी बहूँ तानिया को बेटी जैसा प्यार देने लग जाती हैं

नमस्ते! मैं नितिन सोनी कई वर्षों से इंटरनेट पर एक लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूँ मुझे मजेदार कहानियाँ, शायरियाँ और रिश्तों संबंधित अन्य लेखों को शेयर करना अच्छा लगता हैं मेरे द्वारा एनएस Quotes मंच पर अनेक उपयोगी आर्टिकल को शेयर किया जाता हैं लेखक के साथ-साथ मैं इस ब्लॉग का फाउन्डर भी हूँ मेरा यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! दुबारा भी आए
