Love Story in Hindi : – विवाह के बाद रिश्ते में प्यार होगा या नहीं? अरैन्ज मैरिज होने पर यह प्रश्न स्वभाविक हैं लेकिन किसी व्यक्ति से प्रेम होने के बाद उससे विवाह होने पर, जीवन में प्यार की कमी बहुत कम देखने को मिलती हैं
देश में युवा पीढ़ी प्यार-मोहब्बत को समझने के लिए इच्छुक हैं लेकिन प्यार को समझना एक मुश्किल कार्य होता हैं लव को समझने के लिए प्रेम कहानियाँ पढ़ना एक अच्छा विकल्प हो सकता हैं
यहाँ आरजू और मनोज की प्रेम कहानी, सच्चा इश्क करने वालों के लिए एक प्रेरणा हैं जिसको पढ़कर लाइफ मे आपका प्यार पर विश्वास अधिक गहरा हो जाता है प्यार करना गलत नहीं होता है, प्यार को प्यार से जीतना पड़ता है
जिस तरह मनोज तथा आरजू एक-दूसरे के साथ पूर्ण हैं ठीक उसी तरह दो प्यार करने वाले व्यक्ति एक दूसरे से मिलने पर ही पूर्ण होते है
प्रेम कहानी में मुख्य किरदार
| प्रेमी का नाम – | मनोज तिवारी |
| मनोज का पिता – | सुरेश तिवारी |
| मनोज की माता – | प्रेमा तिवारी |
| प्रेमिका का नाम – | आरजू शर्मा |
| आरजू के पिता – | कमल शर्मा |
| आरजू की माता – | सुनीता शर्मा |
| आरजू का बड़ा भाई – | विवेक शर्मा |
| लाइब्रेरी का स्थान – | भूर, बुलंदशहर |
Love Story in Hindi (Stories in Hindi) – Romantic Love Story Hindi (Romantic Love Stories in Hindi).
मनोज उत्तर-प्रदेश के बुलंदशहर जिले का निवासी था जिसका स्वभाव, लड़कियों को पटाना नहीं था क्योंकि उसको पढ़ना-लिखना अधिक पसंद था इसीलिए वह अपना अधिक समय किताबी दुनिया में बीताया करता था
परिणामस्वरूप उसको रोजाना किताबे पढ़ने का बहुत अधिक शौक था एक दिन मनोज सुबह लगभग 11 बजे आरडी लाइब्रेरी में जाता है जो बुलंदशहर के भूर पर स्थित हैं वहाँ उसने पहली मुलाकात में आरजू शर्मा को देखा,

उस समय आरजू कई सारी बुक्स के बीच बैठी हुई उनमे कुछ ढूंढ रही थी, जब मनोज की आरजू शर्मा पर पहली नजर पड़ी, तब वह उसको देखने के बाद, कुछ पल के लिए उससे अपनी नजरों को हटा नहीं पा रहा था
यह वो पल था जब मनोज के दिल में आरजू को लेकर एक प्यार से भरा एहसास जन्म ले रहा था किताबों के शौकीन मनोज तिवारी को पढ़ने के साथ-साथ लिखने का भी शौक था, उसके लिखने में एक अलग-सा जादू था
लेकिन उसको यह पता नहीं था कि आरजू शर्मा को ही गाने (संगीत) का बहुत शौक हैं, मनोज ने उस लाइब्रेरी में आरजू को पहली बार देखा था लेकिन वहाँ आरजू का आना-जाना भी मनोज की तरह बहुत होता था अपनी पहली मुलाकात के बाद मनोज तिवारी,
हर पल आरजू पर पड़ी अपनी पहली नजर की तस्वीर को याद करता रहता, अन्य कामों में उसका मन कम लगने लगा
कुछ दिनों बाद मनोज, आरजू को देखने की इच्छा लेकर लाइब्रेरी मे चला गया जहाँ उसको आरजू बैंच पर बैठी हुई, एक पुस्तक पढ़ती दिखाई दी, वह उससे बातचीत करने का मन बना चुका था इसीलिए मनोज उस बुक को लेकर आरजू के बराबर में जाकर बैठ गया
जिसको आरजू पहले से पढ़ रही थी, उस दौरान बुक के कुछ शानदार किस्सों से आरजू और मनोज के बीच बातचीत आरंभ होती हैं, तथा मनोज और आरजू दोनों एक-दूसरे के साथ बुक वाली बातें करके थोड़ा हँसी मजाक करना शुरू कर कर देते हैं
लाइब्रेरी बनी मनोज और आरजू के मिलन का कारण
किताबों का शौक रखने वाले मनोज को आरजू से मिलना और बातचीत करना अच्छा लगने लगा उधर आरजू भी मनोज के साथ मिलकर बुक पढ़ना काफी पसंद करने लगी थी परिणामस्वरूप वह दोनों उस लाइब्रेरी में एक साथ मिलकर बुक पढ़ने लगे

कुछ दिनों तक यह सिलसिला लगातार चलता रहा जिसके कारण मनोज और आरजू बुक्स रीडिंग फ़्रेंड्स बन गए धीरे-धीरे उन्हे एक दूसरे के साथ कुछ समय बिताने पर एहसास हो गया कि वह दोनों जीवन में एक-दूसरे के लिए बने हैं
मनोज और आरजू को यह समझ आ चुका था कि वह दोनों एक दूसरे के साथ सम्पूर्ण जीवन बीता सकते हैं
लिखने और गाने का मिलन
एक रुचि रखने वाले लोग एक दूसरे को कुछ बेहतर समझ सकतें हैं इसीलिए आरजू और मनोज दोनों एक दूसरे के सामने सरल और रियल थे इसीलिए उनके बीच दिखावा करने वाली कोई बात नहीं थी
आरजू के द्वारा गाने वाले गानों में मनोज डूब जाता था और जब मनोज, आरजू के लिए कोई कविता लिखता तथा उसको सुनाता तब आरजू उसकी कविता के शब्दों में खो जाती थी कविता एंव गाने की यह स्थिति उन दोनों के जीवन में प्यार को बढ़ाने का मार्ग बन रही थी
मनोज ने कुछ गाने, आरजू के लिए लिखे जिसको आरजू ने रिकार्ड किया और वह उनको पब्लिक करना चाहती थी
मनोज द्वारा प्यार का इजहार होना
यह सच्चाई है कि आरजू शर्मा, मनोज तिवारी को एक जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करने के विचार को अपने मन में जगह दे रही थी लेकिन जिस तरह मनोज ने सबसे पहले आरजू को देखा और उसके लिए अपने दिल में प्यार को जगाया
ऐसे में मनोज का आरजू के साथ बार-बार मिलना, हँसी मजाक करना, एक साथ समय बीताना इत्यादि स्थितियाँ आरजू के लिए, मनोज के दिल मे स्थित प्यार में लगातार बढ़ोत्तरी कर रही थी परिणामस्वरूप मनोज के मुँह पर दिल वाली बात जल्दी आई

उसके अगले दिन मनोज तिवारी, आरजू के आने से पूर्व लाइब्रेरी में पहुँचकर, आरजू से अपने प्यार का इजहार करने के लिए सारी तैयारी करने लगा वह अपने दिल वाली बातों को कुछ शानदार लाइन के रूप में लिखकर लाया था
उस दिन जब आरजू लाइब्रेरी में आई तब वहाँ अपने लिए स्पेशल चीजों को देखकर खुश हो जाती हैं उसके बाद मनोज तिवारी, आरजू को प्रपोज करते हुए कहता हैं कि
जब से मिला हूँ तुम मैं, खोने से डर लगता हैं..
इश्क में हूँ जब से तुम्हारे मैं, बताने से डर लगता हैं..
प्यार किया हैं ज़िंदिगी में सिर्फ तुमसे, तुम्हारे ना होने से फर्क पड़ता है..
कबूल करता हूँ इश्क अपना मैं, बस तेरी ना सुनने से दिल डरता हैं..
लिखने-पढ़ने का शौक बहुत हैं मुझे, प्यार का इजहार कुछ पंक्तियों में लिखने से डर लगता है..
तुझे सुनता हूँ तब सुकून मिलता है मुझे, वरना बेचैन होने से डर लगता है..
मनोज के दिल से सुनी बातों को सुनकर, आरजू उसके प्यार को सम्मान देती हैं जिसके बाद वह दोनों एक दूसरे से प्रेम होने को पूर्ण रूप से स्वीकार करते हैं तथा शादी को लेकर विचार करने पर सहमति बनाते हैं
मनोज को मिली सरकारी नौकरी
विवाह करने से पूर्व मनोज के लिए एक अच्छी नौकरी प्राप्त करना अधिक जरूरी था लेकिन मनोज तिवारी पढ़ने-लिखने में अधिक रुचि रखने वाला व्यक्ति था जिसके परिणामस्वरूप उसको बुलंदशहर में एक सरकारी नौकरी प्राप्त हो जाती हैं
नौकरी में मनोज का सैलेरी पैकीज 80000 रुपए हैं यहाँ मनोज के पिता सुरेश तिवारी एक कपड़ा व्यापारी हैं जिनका बुलंदशहर में अच्छा कारोबार चलता है, तथा बुलंदशहर में उनकी जान-पहचान बहुत अच्छी हैं, अपना घर हैं
मनोज के पिता नए युग को समझने वाले व्यक्ति हैं व्यापारी होने के कारण, समाज में बेहतर बातचीत के लिए मनोज के पिता एक अच्छा अनुभव रखते हैं उसीतरह मनोज की माता प्रेमा तिवारी एक अच्छी महिला है यह हाउसवाइफ हैं
मनोज को पता था कि उसके विवाह में कुंडलियाँ मिलाई जा सकती हैं इसीलिए उसने आरजू और अपनी कुंडली को किसी अच्छे पंडित से पहले ही मिलवाकर यह पता कर लिया था कि उसके और आरजू के विवाह में कोई रुकावट नहीं है
मनोज-आरजू के परिवार वालों को मनाना
विवाह करने के लिए मनोज और आरजू के द्वारा अपने-अपने परिवार वालों को मनाना बहुत जरूरी था जिसके लिए सबसे पहले मनोज अपने घर पर आरजू के विषय पर बताता है और कहता है कि पापा मैं आरजू से बहुत प्यार करने लगा हूँ
हमें मिले लगभग 11 महीने हो चुके हैं मैं यह सब आपको पहले बताना चाहता था लेकिन नौकरी नहीं थी मेरे पास बस! इसीलिए थोड़ा इंतेजार कर रहा था जिसके बाद उसके पिता लड़की आरजू और उसके परिवार के विषय पर उससे कुछ पूछते है
यह बातचीत मनोज की मम्मी प्रेमा सुन लेती हैं उसीदौरान मनोज अपने पिता (सुरेश तिवारी) से आरजू के घर रिश्ते को लेकर बातचीत करने के लिए कहता हैं यह सुनकर प्रेमा और सुरेश दोनों मिलकर, आरजू के घर विवाह के लिए प्रस्ताव भेजने पर सहमति बना लेते हैं
आरजू के घर रिश्ते का प्रस्ताव पहुँचा
मनोज के पिता एक अनुभवी व्यापारी हैं उन्होंने आरजू के पिता कमल शर्मा से सीधा मिलकर इस विषय पर बातचीत करने का निर्णय लिया इस स्थिति को अधिक सरल बनाने के लिए वह किसी ऐसे व्यक्ति को साथ लेकर आरजू के घर पहुंचे जिसको आरजू के पिता अच्छे से जानते थे उस दौरान मनोज के पिता द्वारा आरजू-मनोज के रिश्ते को लेकर प्रस्ताव रखा गया
आरजू के पिता बुलंदशहर में एक नामी व्यक्ति थे जिनकी लोगों के साथ अच्छी जान पहचान थी वह बुलंदशहर कचेरी में बैठा करते थे दोनों पिताओं के बीच यह पहली मुलाकात बहुत अधिक सकारात्मक रही जिसके बाद उन दोनों ने सम्पूर्ण परिवार के साथ मिलने का निर्णय लिया
कुछ दिनों बाद मनोज के परिवार से कुछ खास लोग, आरजू के घर पहुंच गए जहाँ आरजू का भाई विवेक शर्मा भी उपस्थित था, भाई विवेक बुलंदशहर के सराफा मार्केट में एक सुनार था जिसने भी मनोज के घर-परिवार वालों के विषय पर जानकारी निकाली थी
सब कुछ सही रहने के बाद पंडित द्वारा मनोज-आरजू की कुंडलियों को मिलवाया गया परिणामस्वरूप उनके 30 गुण मिले उसके बाद दोनों परिवारों ने सम्पूर्ण रीति-रिवाजों के साथ रिश्ते को पक्का कर दिया

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