हार्ट टचिंग लव स्टोरी (Love Story in Hindi) दीपक और रेनू वाली प्रेम कहानियाँ

Love Story in Hindi:- दुनिया में लव एक खूबसूरत चीज हैं जिसको हो जाए, वह सिर्फ उस मनुष्य के बारे मे सोचने लगता हैं जिसको वह प्यार करने लगा हैं इंटरनेट से लेकर यूट्यूब तक आपको हजारों प्रेम कहानियाँ देखने एंव सुनने के लिए मिल जाएगी

लेकिन कुछ शानदार कहानियों का आनंद केवल पढ़कर लिया जाता हैं मैं आपको एक प्रेरणादायक लव स्टोरी के बारे मे बताने वाला हूँ यह कहानी शारीरिक सुन्दरता को नजरअंदाज करने प्यार के पवित्र बंधन को सम्पूर्ण उत्तरदायित्वों के साथ निभाने के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं

जिसका मुख्य किरदार एक दीपक नाम का व्यक्ति हैं जोकि यूपी के बुलंदशहर का निवासी हैं दीपक वर्मा की यह प्रेम कहानी दिल को छू लेने वाली हैं क्योंकि यहाँ प्यार में समर्पण हैं परिणामस्वरूप यह हार्ट टचिंग लव स्टोरी बन जाती हैं

किरदारों के विषय पर सूची

मुख्य किरदार नाम (प्रेमी) –दीपक वर्मा
पिता –मुकेश वर्मा
माता –सावित्री वर्मा
बड़ा भाई –मनोज वर्मा
लड़की का नाम (प्रेमिका) –  रेनू वर्मा
पिता –कमल वर्मा
माता –राधा वर्मा
छोटो बहन –वर्षा वर्मा
स्थान –बुलंदशहर (उत्तर-प्रदेश)

 

दीपक के विषय पर कुछ महत्वपूर्ण बातें

स्टोरी का स्थान बुलंदशहर (उत्तर-प्रदेश) को कहा जा सकता हैं क्योंकि दीपक वर्मा यूपी के बुलंदशहर में गंगा नगर कालोनी के निवासी हैं तथा उनकी पिताजी मुकेश वर्मा एक खानदानी सुनार हैं यह बुलंदशहर के सराफा बाजार में सोने-चांदी के लोकप्रिय विक्रेता हैं

एक खानदानी सुनार होने के कारण पूरे बुलंदशहर में यह लगभग हर व्यक्ति को जानते हैं दीपक के परिवार में उसकी माता सावित्री वर्मा एक हाउसवाइफ हैं दीपक के परिवार में उसका एक बड़ा भाई मनोज वर्मा भी हैं

दीपक का स्वभाव शांत रहने वाला हैं तथा वह लाइफ में प्यार की अहमियत को अच्छे से जानता हैं

रेनू के विषय पर कुछ महत्वपूर्ण बातें

दीपक के परिवार की तरह रेनू भी एक वर्मा परिवार की लड़की हैं जिसका निवास स्थान बुलंदशहर का काला आम हैं रेनू के पिता(कमल वर्मा) भी मुकेश की तरह सोने-चांदी का कारोबार करते हैं जिनका घर एंव दुकान दोनों काला आम पर हैं

मुख्यत: रेनू के परिवार में पिता (कमल वर्मा) माँ (राधा वर्मा), छोटी बहन (वर्षा वर्मा) हैं रेनू शारीरिक रूप से दिखने में एक अच्छी लड़की हैं परंतु उसको अधिक सुन्दर नहीं कहा जा सकता हैं

लेकिन रेनू वर्मा कोमल ह्रदय, अच्छी सोच, सबका सम्मान करने वाली लड़की हैं जो लाइफ में बिना अधिक चमक धमक के साधारण रहना पसंद करती हैं

हार्ट टचिंग लव स्टोरी (Hindi Love Story) – Real Love Story in Hindi (Romantic Story in Hindi).

दीपक और उसका परिवार जिस कालोनी में रहते हैं उसमें केवल वही सुनार नहीं हैं बल्कि कई और वर्मा परिवार भी हैं लेकिन एक वर्मा परिवार, उनके घर के सामने वाले घर में रहता हैं जिसके मुखिया का नाम अर्जुन वर्मा था उसके परिवार में पत्नी सुजाता वर्मा, पुत्री तनुष्का वर्मा थी

अर्जुन की बेटी तनुष्का की उम्र लगभग 23 वर्ष हैं और वह अपनी पुत्री के विवाह हेतु एक अच्छा लड़का ढूंढ रहा था उसने बुलंदशहर में अपनी पुत्री के लिए एक अच्छा लड़का (वरुण वर्मा) ढूंढकर उसके साथ, पुत्री का विवाह तय कर दिया शादी तय होने के बाद, सबको निमंत्रण पहुंचाए जा रहे थे

अर्जुन ने मुकेश वर्मा के साथ-साथ अन्य सभी कालोनी के घरों में अपनी पुत्री के विवाह का निमंत्रण भेज दिया तनुष्का के मामा कमल वर्मा को उनके पूरे परिवार के साथ आने का निमंत्रण भी दिया गया

तनुष्का के साथ अत्यंत करीबी रिश्ता होने के कारण कमल एंव उसका पूरा परिवार विवाह में 15 दिन पहले से शामिल हो गए यहाँ रेनू भी तनुष्का के विवाह हेतु, गंगा नगर कालोनी आई थी 

तनुष्का-वरुण के विवाह हेतु गणेश पूजा

विवाह में सबसे पहले गणेश पूजा होती हैं तनुष्का के पिता अर्जुन वर्मा ने अपने घर पर गणेश पूजा का आयोजन किया जहाँ दीपक ने सर्वप्रथम रेनू को पूजा स्थल पर देखा, उस समय रेनू अपनी बहन तनुष्का के विवाह हेतु गणेश पूजा की तैयारियों में लगी हुई थी

उसका यह सरल आचरण देखकर दीपक के दिल में कुछ-कुछ हो रहा था लेकिन दीपक अपनी इन भावनाओ से अंजान था कुछ समय बाद, गणेश पूजा के सम्पन्न होने पर रेनू ने घर पर आए सभी मेहमानों को पूजा का प्रसाद देना शुरू किया उस दौरान जब रेनू द्वारा दीपक को पूजा का प्रसाद दिया गया

तनुष्का-वरुण के विवाह हेतु गणेश पूजा

तब उसको एक अजीब सा एहसास हुआ यह पहली मुलाकात रही लेकिन दीपक के दिल में रेनू के लिए एक खास एहसास जन्म ले रहा था प्रसाद लेने के बाद दीपक अपने घर वापस चला गया 

रोजना रेनू-दीपक की मुलाकात होना

विवाह की अनेक तैयारियों को देखने के लिए रेनू तनुष्का के घर रुक जाती है गणेश पूजा के अगले दिन दीपक को, उसके परिवार वालें किसी कार्य से सामने अर्जुन के घर भेज देते हैं जहाँ वह दूसरी बार रेनू से मिलता हैं दीपक एक शांत स्वभाव वाला लड़का हैं लेकिन प्यार में व्यक्ति अगर देर करता हैं

तो उसका नुकसान हानिकारक होता हैं उस समय पूजा के कार्यों में व्यस्त थी दीपक उससे बात करने का मौका प्राप्त करने के लिए पूजा के कार्यों में उसका हाथ बताने लग जाता हैं इस दौरान वह रेनू से पूछता हैं कि मैंने आपको पहली बार देखा हैं, आप तनुष्का की फ्रेंड हैं क्या?

रोजना रेनू-दीपक की मुलाकात होना

रेनू हिचकिचाते हुए कहती हैं कि नहीं! तनुष्का मेरी बुआ की लड़की हैं

दीपक ने कहा कि अर्जुन अंकल हमारे पड़ोसी हैं और मेरे पापा के अच्छे दोस्त भी! लेकिन मैं यहाँ बहुत कम आता हूँ

रेनू ने कहा कि आपको कुछ चाहिए?

दीपक ने कहा कि नहीं-नहीं! मैं सुजाता आंटी के कहने पर पूजा के लिए फूल लाया था

दीपक को बातें करने का कम शौक हैं इसीलिए वह इतनी बातों के बाद अपने घर वापस चला जाता हैं लेकिन उधर अर्जुन, मुकेश से यह बोल रहा था कि अरे यार! लड़की की शादी हैं और कम बहुत ज्यादा हैं मैं यह सब कुछ अकेले कैसे करूंगा!

जिसके बाद मुकेश ने उत्तर मे कहा कि अरे भाई! तू फिक्र मत कर, एक काम करता हूँ मेरा छोटा बेटा दीपक है ना, मैं उसको तेरी मदद के लिए भेज देता हूँ और अगर तुझे मेरे जरूरत पड़े तो मुझे बता देना

इतना कहकर वह अपने पुत्र दीपक को आवाज लगाकर अर्जुन अंकल की मदद के लिए बोल देता हैं दीपक पिता की बात को मानते हुए मदद के लिए तैयार हो जाता है यहाँ उसको रेनू के आस-पास रहने का अच्छा अवसर मिल जाता है 

वरुण-तनुष्का की सगाई वाला दिन

पूजा के कुछ दिनों बाद तनुष्का और वरुण की सगाई होती हैं जिसकी तैयारियों में रेनू और दीपक एक खास भूमिका निभाते हैं इस दौरान रेनू और दीपक के बीच बातचीत के साथ-साथ थोड़ा बहुत हँसी मजाक होना शुरू हो जाता हैं वह दोनों एक दूसरे के साथ घुलना-मिलना शुरू कर देते हैं

इस दौरान दीपक रेनू के सामने मित्रता के लिए प्रस्ताव रखता हैं और कहता हैं कि तुम्हें नहीं लगता कि हमें एक दूसरे का अच्छा मित्र बन जाना चाहिए? सच कहूँ तो मेरे पास लाइफ में ज्यादा दोस्त नहीं हैं शायद! मैं इतनी जल्दी किसी के साथ घुलता-मिलता नहीं हूँ इसीलिए,

वरुण-तनुष्का की सगाई वाला दिन

रेनू दोस्ती के प्रस्ताव को लेकर विचार करने लगती हैं जिसके बाद दीपक रेनू से हँसते हुए कहता है कि रेनू तुम्हें फिलाल ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं हैं! तुम यह सब आराम से बाद में सोच लेना अभी हमें शादी की बहुत तैयारियां करनी हैं

ऐसा कहकर दीपक शादी की अन्य तैयारियों में लग जाता है और मित्रता वाली बात को लगभग भूल सा जाता हैं

कुछ दिनों बाद रेनू-दीपक से कहती हैं कि ठीक है! हम अच्छे दोस्त बन सकते हैं रेनू एक साधारण लड़की थी लेकिन उसने यह फैसला इसीलिए लिया था क्योंकि उसको दीपक के साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा था वह दीपक के शांत स्वभाव को समझने लगी थी दीपक रेनू के मुँह से यह सब सुनकर खुश हो जाता हैं

तनुष्का-वरुण के विवाह से पूर्व हल्दी-मेहंदी  

तनुष्का के विवाह से पूर्व उसकी मेहंदी और हल्दी होती हैं जिसके लिए अर्जुन ने एक मंडप बुक किया होता हैं उस दिन रेनू को तैयार अवस्था में देखकर दीपक के होश उड़ने लग जातें हैं रेनू एक साधारण लड़की हैं लेकिन हल्दी और मेहंदी में वह खुद को सिम्पल तरीके से तैयार करती हैं

तनुष्का-वरुण के विवाह से पूर्व हल्दी-मेहंदी  

यह सब देखकर दीपक के दिल में रेनू के लिए इश्क वाली भावनाएं अधिक प्रबल होने लगती हैं हल्दी में दीपक भी कुछ कम नहीं लग रहा होता हैं रेनू जब दीपक को देखती हैं तब वह उसकी तारीफ करती हैं जिसके बाद दीपक भी रेनू की तारीफ में कुछ लाइन कहता हैं

मैं होश में हूँ या नहीं! यह किसको पता हैं,

लगता है कि तेरी खूबसूरती एक नशा हैं,

मैं डूब रहा हूँ इसकी गहराइयों में हे सनम, क्या तुझे यह पता है,

रात है या दिन! अब मैं यह कैसे बताऊँ, तू साथ हैं तो वक्त का किसको पता है,

दिल करता है लिखता रहूँ तेरी विषय पर ज़िंदिगी भर मैं, दुनिया की किसको परवाह है,

मैं इश्क में हूँ या नहीं! यह पता नहीं मुझे मोहतरमा! बस तुम्हारे साथ जीना है यह पता है,

लिखने का शौक नहीं हैं मुझे, लेकिन बात जब तुम्हारी होती है तो क्या लिखना है यह मेरे दिल को पता है,

मैं कबूल करता हूँ कि तुमसे सच्चा इश्क हैं मुझे जनाब! कल हो ना हो यह किसको पता है,

यह कुछ शानदार लाइन रेनू के दिल को छू लेती हैं लेकिन वह समझ जाती हैं कि दीपक उससे प्रेम करने लगा हैं उस दौरान दीपक भी कुछ खोया-खोया सा रहता है उसको यह पता नहीं होता है कि वह उस लड़की से दिल की बातें अपनी लाइन में बोल रहा हैं

इस स्थिति में दीपक-रेनू के सामने चुप सा हो जाता हैं यहाँ रेनू बिना कुछ कहे वहाँ से जाने लगती हैं जिसके बाद दीपक पीछे से रेनू का हाथ पकड़ते हुए कहता हैं कि रेनू मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता हूँ! पता नहीं यह सब कब हुआ लेकिन मुझे तुमसे प्यार हो गया हैं,

अब यह सब मेरे बस मे नहीं था मैं जानता हूँ कि तुम मुझे अपना एक अच्छा दोस्त मानती हो लेकिन मैं उस खास रिश्ते को तुम्हारे लिए अपने दिल में प्यार के चक्कर में खोना नहीं चाहता हूँ, मैंने जब तुम्हें देखा तो एकदम से पता नहीं यह सब दिल से खुद निकल पड़ा,

तुम्हें इस विषय पर अच्छे से सोचने का पूरा हक है और तुम्हारे ऊपर कोई दबाब नहीं हैं कुछ दिनों बाद हम इस विषय पर पास वाले मैदान में मिलकर चर्चा करेंगे मैं तुम्हारा इंतेजार करूंगा ( शाम 5 बजें)

शाम पाँच बजे दीपक-रेनू की मुलाकात होना

कुछ दिनों बाद रेनू और दीपक पाँच बजे पास वाले मैदान में मिलते हैं जहाँ वह एक दूसरे के साथ खिलकर प्यार वाले विषय पर बातचीत करते हैं रेनू के दिल में भी दीपक के लिए कुछ था लेकिन वह उसको स्वीकार नहीं कर पा रही थी क्योंकि उससे पहले रेनू ने यह सब नहीं सोचा था

रेनू एक सिम्पल रहने वाली लड़की थी उसको प्यार के चक्कर में नहीं पड़ना था उस दौरान रेनू ने दीपक को कहा कि मैं आपसे प्यार नहीं करती हूँ! मैं जानती हूँ कि यह सब मेरे मुँह से सुनकर आपको बुरा लगेगा लेकिन हम अच्छे दोस्त हैं और ऐसे में मैं आपको ख्यालों वाली दुनिया में डूबते हुए नहीं देखना चाहती हूँ

शाम पाँच बजे दीपक-रेनू की मुलाकात होना

दीपक रेनू की बातों को पीछे छुपे प्यार को समझने लगा था उसने रेनू को उत्तर मे कहा कि अच्छा ठीक हैं रेनू! मैं खुद को समझाने का पूरा प्रयास करूंगा लेकिन मुझे तुम्हारी आँखों में अपने लिए प्यार और परवाह दोनों दिखाई देती हैं

शायद! तुम अकेले में खुद से यह प्रश्न दुबारा पूछो कि क्या तुम मुझे प्यार करती हो? जब तुम्हें इसका सही जवाब मिले हमारी दोस्ती को खोना मैं भी नहीं चाहता हूँ लेकिन इस स्थिति में मैं खुदको यहाँ तनुष्का के विवाह तक नहीं रोक सकता हूँ

इसीलिए मैंने यह निर्णय लिया है कि मैं बिजनस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूँ अब मैं सीधा तनुष्का के विवाह पर आऊँगा इससे हम दोनों इस स्थिति को अच्छे से समझ पाएंगे

दीपक एक समझदार लड़का था वह जानता था कि रेनू की ना के बाद उसका रेनू के सामने रोजाना आना सही नहीं होगा इसीलिए वह उससे दूर चला जाता है

रेनू और दीपक का मिलन

दीपक द्वारा रेनू से दूर हो जाने का निर्णय परिस्थितियों के हिसाब से बिल्कुल सही था लेकिन उसके जाने के बाद रेनू का किसी भी कार्य में मन नहीं लग रहा था शायद! उसको यह एहसास होने लगा था कि दीपक के बिना वह नहीं रह सकती हैं और वह उससे प्यार करने लगी हैं

उधर दीपक, रेनू की ना सुनने के बाद अपने बिजनस में अपना मन लगाने का प्रयास कर रहा था उस दौरान दीपक ने अपने बिजनस को अधिक आगे बढ़ाने के लिए कई अच्छे निर्णय लिए, परिणामस्वरूप उसके पिता का सोने-चांदी का व्यापार आसमान छूने लगा

दीपक के पिता मुकेश वर्मा उसकी बढ़ती कामयाबी को देखकर बहुत प्रश्न थे लेकिन दीपक के अंदर उसके टूटे हुए दिल का ग़म था कुछ दिनों बाद तनुष्का के विवाह का दिन आया, जिसमें शामिल होने के लिए दीपक वहाँ आया

इधर रेनू दीपक के आने का इंतेजार बहुत समय से कर रही थी क्योंकि उसको दीपक से प्यार होने का एहसास हो चुका था क्योंकि रेनू और दीपक अच्छे दोस्त थे इसीलिए रेनू सबसे पहले अपनी दोस्ती को दुबारा कायम करना चाहती थी

दीपक तनुष्का के विवाह को अटेन्ड करने के लिए मंडप में पहुंचता है जहाँ रेनू दीपक से मिलती है और कहती है कि तुम्हें बहुत दिनों बाद देखा हैं मैंने, हम अच्छे दोस्त हैं आपके जाने के बाद आपका कोई संदेश मुझे नहीं मिला है क्या आप अभी भी पिछली बातों को लेकर नाराज हैं

दीपक रेनू के सामने अपने अंदर वाले दुख को नहीं दिखाना चाहता है तथा वह रेनू से कहता है कि नहीं! मैं आपसे कैसे नाराज हो सकता हूँ, वो मैं जिस कार्य के लिए गया था उसमें समय का पता नहीं चला.. हाँ तुमने सही कहा रेनू हम अच्छे दोस्त हैं

रेनू और दीपक का मिलन

रेनू दीपक के मुँह से यह बात सुनकर बहुत खुश हो जाती है जिसके बाद वह दीपक के हाथ वाली छोटी उंगली से अपने हाथ वाली छोटी उंगली को मिलाकर अपनी दोस्ती को दिखाती हैं

तनुष्का-वरुण का विवाह होना

रेनू और दीपक तनुष्का के विवाह में शामिल होते हैं लेकिन रेनू के दिल में दीपक के लिए जो एहसास हैं वह तनुष्का के विवाह को देखकर बढ़ने लगता हैं जिसके बाद रेनू, दीपक के सामने अपने दिल वाली बातों को रखने के लिए अवसर ढूँढने लग जाती हैं

विवाह के दौरान दीपक और रेनू के बाद थोड़ा बहुत हँसी मजाक (दोस्ती वाला) होता है इस दौरान रेनू दीपक से कहती है कि मुझे आपसे कुछ महत्वपूर्ण बात करनी है क्या आप मुझे पास वाले मैदान में मिल सकते है?

दीपक के दिल में अभी भी रेनू के लिए बहुत सारा प्यार छुपा था लेकिन वह जानता था कि रेनू उससे प्यार नहीं करती है इसीलिए वह रेनू से मिलने के अवसर को कम करना चाहता था लेकिन रेनू उसकी अच्छी दोस्त थी इसीलिए वह रेनू को मना करके उसका दिल नहीं तोड़ना चाहता था

तनुष्का-वरुण का विवाह होना

इस स्थिति में दीपक, रेनू से मिलने के लिए जाता है जहाँ रेनू दीपक के सामने अपने प्यार का इजहार करना चाहती है वह दीपक के आने पर उसके कंधों पर अपने हाथों को रखकर कुछ प्यार से भरी लाइन उसके लिए बोलते हुए कहती है कि

गए हो जब से आप मेरी ज़िंदिगी से, इंतेजार करना मुश्किल-सा हो गया है

हो गया हैं मुझे भी आपसे बेपानाह वाला प्यार, इतना कहने के लिए यह दिल बहुत दिन तरसा है

आपके बिना सबकुछ अधूरा-सा महसूस करती हूँ मैं, आप अब आए है तो सब पूरा-सा लगता है

दिल दुखाया था मैं पिछली बार आपका, पर दर्द मुझे भी बराबर-सा होता हैं,

क्या बताऊँ आपको अपने इस दिल का हाल, आपके जाने पर यह दिल थोड़ा-थोड़ा करके रोया है,

अगर साथ ना मिले आपका इस ज़िंदिगी मे मुझे तो साँसों का चलना फिर मुश्किल-सा लगता है

मेरे दिल में प्यार छुपा हैं आपके लिए, पिछली बार आपक यह पता चल गया था शायद! मुझसे अपने प्यार के एहसास को समझने मे देरी हुई हैं

रेनू के मुँह से यह सब बातें सुनकर दीपक, बहुत खुश हो जाता हैं जिसके बाद दीपक अपने और रेनू के रिश्ते को विवाह का बंधन देने के लिए अपने पिता मुकेश वर्मा से बात करता हैं दीपक के पिता मुकेश वर्मा एक नामी व्यक्ति हैं

जिसके कारण वह रेनू के पिता कमल वर्मा को उसके विवाह के लिए मना लेते हैं परिवार वालों के द्वारा रेनू और दीपक के विवाह हेतु सगाई के लिए अच्छा दिन ढूंढा जाता हैं परिणामस्वरूप 23 दिसंबर को उनकी सगाई तथा 28 फरवरी को विवाह तय कर दिया जाता है

रेनू और दीपक के विवाह हेतु सगाई होना

23 दिसम्बर के शुभ दिन रेनू और दीपक की सगाई सम्पूर्ण रीति-रिवाजों और परिवार की सहमति के साथ होती हैं यहाँ दीपक, रेनू दोनों एक दूसरे का साथ जीवन भर, लाइफपार्टनर के रूप में पाने के लिए तैयार हो जातें हैं दीपक-रेनू दोनों एक दूसरे से सच्चा वाला इसक करते है

रेनू और दीपक के विवाह हेतु सगाई होना

सगाई होने के बाद वह दोनों एक दूसरे के परिवार वालों के साथ कुछ खास समय बिताते हैं और सभी बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं

गंभीर दुर्घटना का शिकार हुई रेनू

सगाई के कुछ दिनों बाद 22 जनवरी को रेनू अपने सम्पूर्ण परिवार के साथ घूमने के लिए नैनीताल जाती हैं जहाँ उसका पूरा परिवार कार से गए हैं यह एक लंबा सफर होने के कारण सम्पूर्ण परिवार गन्ने का रस पीने हेतु कार को साइड में रुकवाते हैं जिसके बाद सभी लोग कार से उतर जातें हैं

यहाँ रेनू जैसे गन्ने का रस पीने के लिए आगे बढ़ती हैं तब उसका पैर किसी पत्थर से टकराता है परिणामस्वरूप उसका माथा गन्ने की मशीन पर जाकर लगता हैं रेनू के जीवन में यह घटना, उसकी आँखों पर बुरा प्रभाव डालती हैं दुर्घटना के समय कमल रेनू को एक अच्छे अस्पताल में लेकर जाता है

जहाँ पता चलता है कि इस दुर्घटना में रेनू की आँखों की रोशनी चली गई हैं, वह यह बात सुनकर बेचैन हो जाती है, कमल द्वारा दीपक को यह सूचना देकर तुरंत बुलाया जाता हैं, दीपक स्थिति के अनुसार सबसे पहले रेनू को शांत करने का प्रयास करता है और डॉक्टर से इस विषय पर बात करता है

गंभीर दुर्घटना का शिकार हुई रेनू

डॉक्टर उसे बताते हैं कि रेनू की यह स्थिति भविष्य मे ठीक हो सकती है, कमल को लगता है कि दीपक रेनू से विवाह के लिए मना कर देगा लेकिन ऐसा नहीं होता है दीपक अपने विवाह की तारीख को आगे बढ़वा लेता हैं जिसके बाद दीपक और रेनू का विवाह 28 फरबरी की जगह 4 फरबरी को सम्पूर्ण रीति-रिवाजो के साथ सम्पन्न होता है

विवाह के बाद रखा पूरा ख्याल

दीपक के दिल में रेनू के लिए सच्चा वाला प्यार था और प्यार कुछ नहीं देखता है इसीबात को सिद्ध करते हुए दीपक ने रेनू के साथ विवाह किया था और रेनू और दीपक वर्मा का विवाह सम्पूर्ण रीति-रिवाजों के साथ समाप्त होने के बाद दीपक ने अपनी पत्नी रेनू का अच्छे से ध्यान रखते हुए हर छोटी-बड़ी चीज का ख्याल रखा, वह पूरी तरह अपनी पत्नी रेनू को समर्पित था, प्यार में वह रेनू को जीवन के हर तनाव से दूर रखकर उसकी खुशियों का ध्यान रखता था

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