Marriage in Hindi: – युवा पीढ़ी, शादी शब्द सुनकर जिम्मेदारियों के नाम पर घबराने लग जाती हैं भारत में विशेषकर कम उम्र में शादी के नुकसान गूगल में खोजे जाने लगे हैं ऐसी स्थिति में युवाओं के मन में सवाल उठता है कि मेरा शादी कब होगा?
लेकिन युवा पीढ़ी यह जानती हैं कि विवाह एक-दो दिन नहीं बल्कि पूरी ज़िंदिगी निभाने वाला रिश्ता होता हैं ऐसी स्थिति में हमें कब शादी करनी चाहिए? विषय को लेकर लोग अक्सर कन्फ्यूज़ रहते हैं
ऐसी विशेष स्थिति में आपके लिए यह बेहतर होगा कि आप खुद से पूछे कि क्या आप विवाह के लिए तैयार हैं? भारत में कुछ युवाओ के मन विवाह करके जीवनसाथी को लेकर खास सपने होतें हैं जिनमें वह खुशियों को ढूँढता हैं
विवाह क्या है? शादी किसे कहते हैं?
विवाह एक ऐसा पवित्र बंधन होता हैं जिसमें लड़का और लड़की ज़िंदिगीभर साथ रहने के लिए सम्पूर्ण विधि-विधान के साथ समाज के सामने, विवाह के सात वचनों को अग्नि के सामने स्वीकार करते है विवाह को सांस्कृतिक, कानूनी और सामाजिक मिलन कहा जा सकता हैं

क्योंकि विवाह के परिणामस्वरूप, लड़का एंव लड़की को, पति-पत्नी के रूप में रिश्ता कायम करने हेतु स्वीकृति मिलती हैं जिसके बाद वह अपने परिवार को आगे बढ़ाने, ज़िंदिगीभर एक दूसरे का साथ निभाने, एंव जिम्मेदारियों को उठाने के लिए तैयार होते है
भारत में विवाह को विशेषकर दो परिवारों के शुभ मिलन के रूप मे देखा जाता हैं क्योंकि भारत एक सभ्य-संस्कृति वाला देश हैं शादी करने हेतु लड़का एंव लड़की निर्धारित उम्र ( लड़का – 21 वर्ष लड़की – 18 वर्ष ) होने पर कानूनी रूप से विवाह कर सकते हैं जहाँ उनको दो गवाहों के साथ साथ कुछ जरूरी कागजों की जरूरत होती हैं
शादी करने के क्या फायदे है? (Shadi Na Karne Ke Fayde).
लाइफ में विवाह करने या ना करने को लेकर अक्सर युवाओं के मन में शंका बनी रहती है परिणाम यह होता हैं कि वह विवाह न करने के फायदे, जल्दी शादी करने के फायदे, देर से शादी करने के नुकसान इत्यादि प्रश्नों को इंटरनेट पर सर्च करने लग जाते हैं

कुछ युवाओं लाइफ में विवाह न करने वाली इच्छा को परिवार के सामने रखते हुए यह कहते हैं कि मैं शादी नहीं करना चाहता हूं! परंतु परिवार के सदस्य विवाह न करने को लेकर उनकी शंका को दूर न करके, उनके ऊपर शादी के लिए दबाब बनाते हैं
जोकि उचित नहीं हैं विवाह को लेकर फायदें एंव नुकसान दोनों को हमारे लिए समझना जरूरी हैं
- तनाव में पार्टनर का सहारा होना
- शारीरिक जरूरतों का पूरा होना
- करियर में सहायता मिलना
तनाव में पार्टनर का सहारा होना
विवाह के बाद सुख और दुख दोनों में हमें अपने लाइफपार्टनर का साथ मिल जाता हैं हर मनुष्य के जीवन में सुख और दुख दोनों लगे रहते हैं लेकिन अविवाहित व्यक्ति हमेशा अपने दुखों से निर्मित तनाव का अकेले सामना करता हैं
इस स्थिति में विवाहित व्यक्ति को दुख में तनाव को हल्का करने के लिए एक अच्छा जीवनसाथी मिल जाता हैं वह खुद को तनाव से दूर करने हेतु अपने पार्टनर के साथ सुख के कुछ पलों को बीता सकता हैं
शारीरिक जरूरतों का पूरा होना
विवाहित मनुष्य के पास, विवाह के बाद अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने का सुख होता है हर मनुष्य को लाइफ मे शारीरिक संबंध स्थापित करने की जरूरत महसूस होती हैं ऐसी स्थिति में एक अच्छा हमसफ़र बहुत सहायक होता हैं
कई बार लाइफ में हमें अपने शारीरिक कार्य हेतु किसी व्यक्ति की जरूरत पड़ जाती हैं ऐसी स्थिति में विवाह होने पर हमारा लाइफ-पार्टनर हमारी देखभाल, अपने प्यार के साथ कर लेता हैं यह वैवाहिक जीवन का एक गहरा सच हैं
करियर में सहायता मिलना
विवाह करने के बाद एक अच्छा जीवनसाथी मिलना एक किस्मत वाली बात होती हैं कुछ मनुष्य शादी के बाद अपने जीवनसाथी को करियर बिल्ड करने में हर संभव सहायता प्रदान करते हैं,
परिणाम यह होता है कि आप अपने करियर को अच्छे से बिल्ड कर पाती हैं, जोकि विवाह से पहले खुदके घर पर रहकर आप नहीं कर सकती थी लेकिन ऐसा बहुत कम होता हैं
शादी के नुकसान ( Shadi Karne Ke Nuksan ).
- स्वतंत्रतापूर्वक जीवन जीना
- आर्थिक खर्च में बढ़ोतरी एंव तनावपूर्ण बोझ कम होना
- करियर में बांधा उत्पन्न होना
स्वतंत्रतापूर्वक जीवन जीना
कुछ मनुष्य जीवन में बिना किसी रोक-तोक के जीना पसंद करते हैं लेकिन विवाह के बाद लाइफपार्टनर का हमारे ऊपर हक कुछ इस तरह हो जाता है कि कुछ चीजों में उसकी बात का मान रखना हमारे लिए जरूरी होता हैं, आप कहाँ हैं, क्या कर रहें हैं,
भविष्य को लेकर आपकि क्या योजना हैं, इत्यादि चीजों के विषय पर आपके लाइफपार्टनर को पता होना जरूरी होता हैं क्योंकि यहाँ आपके सभी फैसलों का प्रभाव आपके जीवनसाथी के जीवन को भी प्रभावित करता है
आर्थिक खर्च में बढ़ोतरी एंव तनावपूर्ण बोझ कम होना
विवाह के बाद खुदके साथ लाइफपार्टनर के खर्चों का जुड़ना एक स्वभाविक बात हैं इस स्थिति के बाद जीवन में परिवार के बढ़ने तथा बच्चों के पालन पोषण में, मनुष्य का आर्थिक खर्च कब कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है इसका पता नहीं चलता हैं
जोकि मनुष्य के लिए नुकसान वाली बात हैं इसी तरह विवाह करने के बाद मनुष्य विवाह के बाद निर्मित हुए नए-नए रिश्तों जैसे – साला-साली, सास-ससुर, नन्द, देवर इत्यादि की खुद से अपेक्षाओं के कारण, लाइफ में तनाव के बोझ बढ़ने लगता है
परिणाम यह होता है कि मनुष्य के जीवन में भावनात्मक और व्यक्तिगत तनाव बढ़ता हैं
करियर में बांधा उत्पन्न होना
विवाह करने के बाद आपको एक ऐसा लाइफपार्टनर मिल जाता हैं जो आपके सपनों को पूरा नहीं होने देता है वह आपको आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होते हुए देखना पसंद नहीं करता है ऐसी विचारधारा वाले व्यक्ति आपके करियर में एक बांधा बन जातें है
जिसको आप पूरे जीवनभर कभी भी नहीं हटा सकते हैं यह स्थिति भारत में लड़कियों के साथ अधिक होती हैं लेकिन लड़कों के साथ भी यह स्थिति देखने को मिलती हैं जब वह शादी के बाद अपने करियर में रुक से जाते हैं क्योंकि उनके ऊपर अनेक जिम्मेदारियाँ बढ़ने लगती हैं
शादी क्यों नहीं करनी चाहिए और क्यों करनी चाहिए? (Marriage in Hindi)
कई बार लोग विवाह करने का निर्णय लेने में शीघ्रता दिखाकर, लाइफ में सबसे बड़ी गलती को कर बैठते हैं परिणामस्वरूप आपको गलत समय पर जीवन में लाइफ-पार्टनर मिल जाता हैं जिसके बाद हमें उसकी कदर नहीं होती हैं

विवाह के प्रति युवा पीढ़ी को समझने के लिए तथा विवाह करने से पूर्व कुछ बातों का अध्ययन करना आवश्यक होता हैं अन्यथा विवाह जैसे पवित्र रिश्ते का सफल होना मुश्किल कार्य लगता हैं
- बिना सोचे-समझे विवाह को न करें
- इमोशनल लगाव का होना
- पारिवारिक दबाब उचित नहीं होगा
- भविष्य को लेकर समर्थन करना एक अच्छा संकेत
- विवाह में प्यार का विशेष महत्व
- ट्रस्ट वाला रिश्ता बनना सही होगा
- विवाह से बदलने का विचार सही नहीं होगा
- लाइफ में आर्थिक स्थिरता का होना
- पैसा हेतु विवाह का रास्ता गलत होगा
- अच्छा स्वास्थ्य रहना सही होगा
- अकेलापन समाप्ति विचार उचित नहीं होगा
- विचार-विमर्श करके विवाह करें
बिना सोचे-समझे विवाह को न करें
लाइफ में चलने वाली किसी भी समस्या का समाधान शादी के रूप मे नहीं देखा जा सकता हैं क्योंकि जिन लोगों के बीच बिना कुछ विचार किये सिर्फ वर्तमान ज़िंदिगी में चलने वाली समस्या को खत्म करने हेतु विवाह किया जाता हैं
उनका विवाह एक ऐसा समझौता बनकर रह जाता है जिसका सफलता प्राप्त करना असंभव होता हैं परिणाम यह होता है कि ज़िंदिगी में समस्याएं अधिक बढ़ जाती है यह किसी नए व्यक्ति के साथ जीवन जीने के लिए पहला कदम होता हैं
इमोशनल लगाव का होना
विवाह हेतु इमोशनल लगाव का होना महत्वपूर्ण हैं लेकिन मनुष्य को इमोशनल लगाव वहाँ होता हैं जहाँ उसको सच्चा इश्क होता हैं, ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति आपके जीवन में आने वाले सभी सुखों और दुखों में आपके साथ हमेशा खड़ा रहता हैं
जिसके आपके साथ इमोशनल लगाव हैं क्योंकि वह व्यक्ति लाइफ में आपके बिना जीने को लेकर कल्पना भी नहीं कर सकता हैं, उसको लाइफ में सिर्फ आप चाहिए और कुछ नहीं.. जीवन मे कभी अगर आपके साथ ऐसी स्थिति बन रही हैं तब आपको विवाह के लिए ना नहीं कहना चाहिए
पारिवारिक दबाब उचित नहीं होगा
भारत जैसे सभ्य-संस्कृति वाले देश में युवाओं पर शादी करने को लेकर पारिवारिक दबाब बनाना सही नहीं होता हैं ऐसी स्थिति में शादी एक महत्वपूर्ण वैवाहिक जीवन के स्थान पर समाज सेवा लगने लगती हैं
घर-परिवार में लोगों के द्वारा बच्चों को शादी के लिए मनाने हेतु यह कहा जाता है कि बेटा! अब तू शादी कर ले, तेरी उम्र हो रही है, कुछ समय बाद समाज में लोग ताने मारने लग जाएंगे
यह सच्चाई है कि युवा पीढ़ी को दुनिया की बातों से अधिक फर्क नहीं पड़ता है परंतु पारिवारिक दबाब के कारण उसको विवाह के लिए हाँ बोलना पड़ जाता हैं परिणाम यह होता है कि लड़का और लड़की दोनों का जीवन खराब हो जाता हैं
भविष्य को लेकर समर्थन करना एक अच्छा संकेत
लाइफ में हर व्यक्ति आगे बढ़ने की भरपूर इच्छा रखता हैं लेकिन विवाह वाली स्थिति में आपके जीवनसाथी को आपके आगे बढ़ने से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए यह लड़कियों के साथ अधिक होता है कि विवाह करने के बाद उनकी ग्रोथ रुक जाती हैं
यह चीज उनको भविष्य निर्माण में पीछे कर देती हैं इसीलिए कहा जाता है कि लाइफ में आपके सपनों को सपोर्ट करने वाला जीवनसाथी बहुत कम देखने को मिलता हैं अगर आपको मिल रहा है तब उस स्थिति मे आपका विवाह के लिए ना कहना सही नहीं होगा
विवाह में प्यार का विशेष महत्व
लाइफ-पार्टनर के रूप में जब हम किसी व्यक्ति को जीवनभर के लिए चुनते हैं तब उस स्थिति में हमारे बीच प्यार विशेषकर महत्वपूर्ण होता हैं रिश्तों में प्यार, भरोसे को जन्म देता हैं जिसके बाद वैवाहिक रिश्ता सुखों के साथ, बिताया जा सकता हैं
प्यार रिश्ते में एक ऐसा एहसास होता हैं जिसके माध्यम से विवाह में शामिल दो लोग जीवनभर खद को एक दूसरे के करीब महसूस करते हैं परिणाम यह होता है कि दो लोगों से बना वैवाहिक रिश्ता, एक परिवार को जन्म देता हैं तथा सुखों के साथ पीढ़ीयों को आगे बढ़ाने का कार्य करता है
ट्रस्ट वाला रिश्ता बनना सही होगा
आपके जीवन मे ट्रस्ट वाला रिश्ता लाइफ पार्टनर के साथ बनने पर आपको शादी करने के लिए तुरंत हाँ बोल देनी चाहिए क्योंकि एक ऐसे जीवनसाथी का मिलना, जिसके ऊपर आप आँख बंद करके विश्वास रखते हैं बहुत मुश्किल होता हैं
वैवाहिक रिश्ते में एक दूसरे का सम्मान होने के साथ-साथ, आपसी समझ में विश्वास होना जरूरी हैं क्योंकि जीवन में समय के साथ-साथ आपके रिश्ते में प्यार कम हो सकता हैं लेकिन भरोसा एक ऐसी चीज हैं जिसको अगर ना तोड़ा जाए तो यह लगातार बढ़ता रहता है
विवाह से बदलने का विचार सही नहीं होगा
कुछ व्यक्ति विवाह करने से पहले, लाइफपार्टनर को अच्छे से जानते हैं, उनको यह मालूम होता हैं कि उनके लाइफपार्टनर में यह-यह कमियाँ हैं लेकिन फिर भी वह यह विचार अपने मन में रखकर विवाह कर लेते हैं कि वो शादी के बाद उसको बदल देंगे
हाँ ऐसा कुछ रिश्तों में होता हैं लेकिन अधिकतर मामलों मे व्यक्ति अपनी-अपनी चलाता हैं परिणाम यह होता है कि आप उसके साथ विवाह में भी बंध जाते हैं और पार्टनर खुद को नहीं बदलता है
जिससे ज़िंदिगी में खराब स्थिति को देखना पड़ जाता हैं ऐसी स्थिति से बचने हेतु आपको लाइफपार्टनर की वर्तमान स्थिति को पूर्ण रूप से स्वीकार करने के बाद, उसे विवाह के लिए अपनी सहमति देनी चाहिए
लाइफ में आर्थिक स्थिरता का होना
आजकल युवा यह बात अच्छे से समझने लगे है कि हमें विवाह करने के लिए हाँ बोलने से पहले खुद के जीवन में आर्थिक स्थिरता को ठीक करना चाहिए क्योंकि वैवाहिक जीवन आरंभ होने के बाद मनुष्य के खर्चों का बढ़ना एक साधारण बात होती हैं
यहाँ आपका भविष्य को लेकर बेहतर सोच होनी चाहिए कि आप भविष्य में किस तरह आगे बढ़ने के ऊपर विशेष रूप से विचार कर रहें हैं अगर आप अपनी लाइफ में आर्थिक स्थिरता को बेहतर बना चुके हैं तब ऐसी स्थिति मे आप विवाह के लिए हाँ बोलने पर विचार कर सकतें हैं
पैसा हेतु विवाह का रास्ता गलत होगा
कुछ लोग ज़िंदिगी में पैसे वाली समस्या से घिरे हुए होते है ऐसी स्थिति में वह झूठ का सहारा लेकर विवाह के रिश्ते में बंध जातें है लेकिन यहाँ आप लाइफपार्टनर को एक धोखा देने के ऊपर विचार कर रहे हैं जिसका बुरा प्रभाव रिश्ते के टूटने का कारण बन सकता हैं
कुछ लड़कियाँ, पुरुषों के साथ विवाह में मात्र इसीलिए बंधती है जिससे वह अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकें, भविष्य में अपने खर्चों को सिक्युर कर सकें परंतु लड़के एंव लड़कियों में विवाह के रिश्ते को लेकर यह सोच उनके वैवाहिक रिश्ते को शुरू होने से पहले खत्म कर देती हैं
अच्छा स्वास्थ्य रहना सही होगा
कुछ लड़के एंव लड़कियों को विवाह से पहले कोई ऐसा रोग हो जाता हैं जिसके परिणामस्वरूप वह ज़िंदिगी भर परेशान रहते हैं लेकिन ऐसी स्थिति होने पर आपको विवाह का विचार बहुत सोच-समझकर करना चाहिए
क्योंकि विवाह के लिए हाँ में जल्दी करना आपके लाइफपार्टनर को दुखों वाला जीवन दे सकता हैं इसीलिए एक खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए, आपका स्वास्थ्य सही होना महत्वपूर्ण हो जाता हैं
अकेलापन समाप्ति विचार उचित नहीं होगा
कुछ लोगों के द्वारा अकेलापन को दूर करने के विचार से विवाह का निर्णय जीवन में लिया जाता हैं लेकिन हमें यह बात समझनी होगी कि विवाह होने के बाद, लाइफपार्टनर आपको तभी खुशी दे सकता हैं जब आप खुद से खुश रहना चाहते हैं
वह आपके साथ जीवन बीता सकता हैं, आपके सुख-दुखों में जीवनभर आपके साथ खड़ा रह सकता हैं परंतु आपके अकेलेपन को दूर नहीं कर सकता हैं क्योंकि व्यक्ति लाइफ मे तभी अकेलापन महसूस करता हैं जब वह वास्तव में जीवन को हार में महसूस करता हैं
विचार-विमर्श करके विवाह करें
युवा पीढ़ी आजकल यह अच्छे से समझने लगी हैं कि जिस व्यक्ति के साथ हम अपना पूरा जीवन बीताना चाहते हैं उसके विचारों का हमारे समझ आना कितना जरूरी होता हैं ऐसी स्थिति में युवा, विवाह से पहले एक दूसरे के साथ खुलकर,
विचार विमर्श करना अधिक पसंद करते हैं जहाँ वह एक दूसरे की पसंदों से लेकर, विवाह के बाद भविष्य को लेकर पहली चर्चा आरंभ करते हैं भारत में अधिकतर विवाह परिवारों की सहमति के साथ किये जातें हैं
जोकि सामाजिक चीजों को देखते हुए सही भी हैं लेकिन रिश्ते में निभाने का कार्य सिर्फ लड़के और लड़की का होता हैं ऐसी स्थिति में समझदारी से काम लेते हुए दोनों का एकांत में बातें करना जरूरी होता है
यहाँ अगर आपके लाइफपार्टनर के साथ विचार-विमर्श मिल रहे हैं तब आपको विवाह के लिए ना नहीं कहना चाहिए
शादीशुदा से शादी क्यों नहीं करना चाहिए?
कुछ लोग लाइफ में किसी न किसी शादीशुदा व्यक्ति से प्यार करने लग जातें हैं क्योंकि प्यार पर किसी का बस नहीं चलता हैं लेकिन हमें यह समझना होगा कि यह कार्य जोखिम से भरा साबित हो सकता हैं क्योंकि अगर कोई व्यक्ति पहले से विवाहित हैं
तब ऐसी स्थिति में हिंदू विवाह अधिनियम (धारा11) के मुताबिक, उसका दूसरा विवाह करना गैरकानूनी हैं परंतु अगर फिर भी कोई व्यक्ति ऐसा करता हैं तब उस स्थिति में उसको लगभग सात वर्ष तक सजा सुनाई जा सकती हैं

एक शादीशुदा व्यक्ति से साथ दुबारा विवाह के विचार पर पूर्ण रूप से भरोसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह पहले विवाह को धोखा दे रहा हैं कुछ लड़कों एंव लड़कियों को लगता है कि वह दूसरा विवाह कर लेंगे!
लेकिन पहली पत्नी या पति के होने पर दूसरा विवाह करना, हिंदुओं में अवैध हैं ऐसी स्थिति समाज में हमारी बदमनी करती हैं हाँ, पहले विवाह को पूर्ण रूप से तलाक देकर प्यार में दूसरे विवाह को स्वीकार किया जा सकता है
क्योंकि कई बार परिवार के दबाब में हम विवाह को लेकर गलत निर्णय लेते हैं यहाँ प्यार करने वाले शादीशुदा व्यक्ति के जीवन में बच्चे होने पर, वह सबसे पहले अपने बच्चों के बारे मे विचार करता हैं इस स्थिति में वह खुदके लिए सोचने से पहले बच्चों के लिए सोचता है
भारत में एक विवाहित स्त्री से विवाह करना, कानूनी रूप से आपको जीवन में कुछ अधिक उलझा देता है क्योंकि यहाँ लड़कियों के परिवार वालें कानूनी दांवपेंच में अधिक जोर लगाते हैं
यहाँ लड़कियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का गलत उपयोग लड़कों को फँसाने या उनपर दबाब बनाने के लिए किया जाता है जिसमें आपके ऊपर प्लानिंग के साथ पुलिस केस किया जाता हैं यहाँ लाइफ में तलकशुदा व्यक्ति से विवाह हेतु विचार किया जा सकता हैं
लेकिन विवाहित व्यक्ति से विवाह पर विचार में भी कई बार सोचना आपके लिए जरूरी हैं फिर भी अगर आप अविवाहित स्त्री से विवाह करना चाहते हैं वहाँ आपको कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए
- उसको आप से क्यों प्यार हैं, क्या यह उसका कोई छल तो नहीं है
- पूर्व विवाह से उसका तलाक हो चुका हैं या नहीं, अगर हाँ, तो उसका पहला लाइफपार्टनर कहाँ हैं
- पहले विवाह से उसके कितने बच्चे है, उनका ध्यान कौन रख रहा है,
- उसके पूर्व विवाह के तालक में कोई रुकावट तो नहीं हैं, अगर हाँ, तो क्या परेशानी है

नमस्ते! मैं नितिन सोनी कई वर्षों से इंटरनेट पर एक लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूँ मुझे मजेदार कहानियाँ, शायरियाँ और रिश्तों संबंधित अन्य लेखों को शेयर करना अच्छा लगता हैं मेरे द्वारा एनएस Quotes मंच पर अनेक उपयोगी आर्टिकल को शेयर किया जाता हैं लेखक के साथ-साथ मैं इस ब्लॉग का फाउन्डर भी हूँ मेरा यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! दुबारा भी आए
